शिमला | शिमला के चलौंठी क्षेत्र में फोरलेन टनल निर्माण के चलते कई रिहायशी भवनों पर खतरा मंडरा रहा है। टनल के भीतर हो रही ब्लास्टिंग के कारण मकानों में दरारें आ गई हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए बीती रात एक बहुमंजिला रिहायशी भवन को खाली करवाया गया, जबकि अन्य भवनों को भी असुरक्षित घोषित किया गया है।
देर रात प्रभावित परिवारों को एहतियातन किसान भवन में शिफ्ट किया गया। इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल है और लोग अपने घरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
मंगलवार सुबह पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह चलौंठी पहुंचे और प्रभावित भवनों का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। मंत्री ने एनएचएआई अधिकारियों को प्रभावितों को तुरंत राहत और मुआवजा देने के निर्देश भी दिए।
मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि वह लंबे समय से फोरलेन परियोजना से प्रभावित लोगों की आवाज उठाते रहे हैं और इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी बातचीत कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि टनल निर्माण में हो रही ब्लास्टिंग से कई मकान असुरक्षित हो गए हैं, जिनमें से दो से तीन मकानों को खाली कराया जा चुका है, जबकि आसपास के अन्य भवनों पर भी खतरा बना हुआ है।
उन्होंने यह भी बताया कि संजौली–ढली बाईपास सड़क पर बड़ी दरारें आ गई हैं, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई है। एनएचएआई को निर्देश दिए गए हैं कि सड़क और भवनों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
वहीं प्रभावित परिवारों ने एनएचएआई पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पहले भी कई बार ब्लास्टिंग से हो रहे नुकसान की शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब उनके घरों पर सीधा खतरा पैदा हो गया है, जिससे वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।