नई दिल्ली | भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है और लगातार सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है। मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर यथावत रखने का फैसला किया है।
गवर्नर ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर करीब 7.4 फीसदी रहने का अनुमान है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जल्द ही जीडीपी और महंगाई जैसे प्रमुख आंकड़ों के आकलन के लिए नई सांख्यिकीय श्रृंखला (New Series) लागू की जाएगी। इससे देश के मैक्रोइकोनॉमिक संकेतकों की रिपोर्टिंग पहले से अधिक सटीक और पारदर्शी हो सकेगी।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए पूरे साल का जीडीपी अनुमान अप्रैल में होने वाली मौद्रिक नीति बैठक तक टाल दिया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि नई जीडीपी सीरीज लागू होने के बाद ही आगामी वित्त वर्ष के लिए ग्रोथ प्रोजेक्शन जारी किया जाएगा।
हालांकि, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026 के लिए विकास दर अनुमान को 7.3 फीसदी से बढ़ाकर 7.4 फीसदी कर दिया है। तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के लिए ग्रोथ अनुमान 7 फीसदी पर बरकरार रखा गया है, जबकि चौथी तिमाही में 6.5 फीसदी वृद्धि की उम्मीद जताई गई है।
इसके अलावा, आरबीआई ने FY27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के लिए विकास दर अनुमान को 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 6.9 फीसदी और दूसरी तिमाही (Q2 FY27) के लिए 6.8 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है।
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि आर्थिक वृद्धि को गति देने में सकल मूल्य वर्धन (GVA) की भूमिका अहम होगी और इसकी वृद्धि दर करीब 7.3 फीसदी रहने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि सेवा क्षेत्र इस मजबूती का मुख्य आधार बना रहेगा। साथ ही विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र में भी सुधार के संकेत मिल रहे हैं, जिससे आगे के महीनों में आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
आरबीआई गवर्नर ने भरोसा जताया कि मजबूत घरेलू मांग और सकारात्मक आर्थिक संकेतक यह साबित करते हैं कि भारत अपनी आंतरिक ताकत के दम पर बाहरी झटकों का सामना करने में सक्षम है।