करनाल | हरियाणा के करनाल में सरकारी तंत्र की गंभीर खामी ने एक बुजुर्ग दंपती के जीवन को परेशानी में डाल दिया है। सेक्टर 34 के रहने वाले रविंद्र की छह साल पहले निधन हो चुकी पत्नी सविता को 16 जिलों में 90 वाहनों की मालिक दिखा दिया गया, जिससे उनकी वृद्धावस्था पेंशन दो महीने से बंद हो गई।
रविंद्र के अनुसार, उनकी पत्नी की मृत्यु 2019 में हुई थी। इसके बावजूद परिवार पहचान पत्र में सविता को न केवल जीवित दिखाया गया, बल्कि बाइक, स्कूटी, कार और ट्रक समेत कुल 90 वाहन उसके नाम दर्ज कर दिए गए। आश्चर्यजनक बात यह है कि इनमें से कई वाहन सविता की मृत्यु के दो साल बाद खरीदे गए, फिर भी उनका नाम उसमें दर्ज कर दिया गया।
इस गलती के कारण सरकारी सिस्टम ने रविंद्र की बुढ़ापा पेंशन रोक दी, क्योंकि नियम के अनुसार यदि किसी परिवार की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से अधिक हो, तो पेंशन का लाभ नहीं मिलता।
केवल करनाल ही नहीं, बल्कि पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद, गुरुग्राम, रोहतक, हिसार, सिरसा, कुरुक्षेत्र, बहादुरगढ़, रेवाड़ी और नारनौल सहित 16 जिलों के आरटीओ कार्यालयों में सविता के नाम पर वाहन दर्ज पाए गए।
इसी तरह, अन्य बुजुर्ग भी सरकारी सिस्टम की खामियों के कारण परेशान हैं। जींद के शादीपुर गांव में 75 वर्षीय दिलबाग की पेंशन काट दी गई क्योंकि परिवार पहचान पत्र में गेहूं की पेमेंट के बाद आय बढ़ा दिखाई गई। पानीपत के समालखा गांव में बलवीर सिंह और उनकी पत्नी भी गलत आंकड़ों के कारण पेंशन पाने से वंचित हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि किसी बुजुर्ग को पेंशन के लिए परेशान नहीं होने दिया जाएगा। अतिरिक्त उपायुक्त योगेश मेहता ने भी इस मामले में जांच कराने और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
रविंद्र ने बताया कि उनके पास केवल एक पुरानी बाइक और स्कूटी है, और दो महीने से लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने लिखित शिकायतें और CM विंडो पर मामला दर्ज कराया है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ।