पंचकूला। पंचकूला नगर निगम की चुनावी प्रक्रिया पर कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम क्षेत्र की आधिकारिक जनसंख्या तीन लाख से कम होने के बावजूद आम चुनाव की तैयारी आगे बढ़ाने के निर्णय पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। इस मामले में एडवोकेट हेमंत कुमार ने हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग को कानूनी नोटिस भेजकर मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग की है।
बताया गया है कि 29 जुलाई 2020 को जारी अधिसूचना के अनुसार पंचकूला नगर निगम के लिए 20 वार्ड निर्धारित किए गए थे। उस समय नगर निगम की कुल जनसंख्या 3,17,476 दर्ज की गई थी, जिनमें अनुसूचित जाति की आबादी 70,679 बताई गई थी।
हाल ही में जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार नगर निगम क्षेत्र की कुल आबादी घटकर 2,91,224 रह गई है। यानी लगभग 26 हजार से अधिक लोगों की कमी दर्ज की गई है। अनुसूचित जाति की जनसंख्या में भी उल्लेखनीय गिरावट सामने आई है, जो 70,679 से घटकर 41,467 रह गई है।
हेमंत कुमार का कहना है कि यदि नगर निगम गठन के लिए न्यूनतम तीन लाख की आबादी आवश्यक है, तो वर्तमान स्थिति में चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले कानूनी स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। उन्होंने निर्वाचन आयोग से मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया पर रोक लगाकर पूरे मामले की समीक्षा करने की मांग की है।
गौरतलब है कि सितंबर 2020 में कालका और पिंजौर के शहरी क्षेत्रों को अलग कर कालका नगर परिषद का गठन किया गया था। जनसंख्या में आई कमी का एक कारण यह पुनर्गठन माना जा रहा है। हालांकि अनुसूचित जाति की आबादी में आई बड़ी गिरावट को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अब सबकी नजर निर्वाचन आयोग के आगामी फैसले पर टिकी है।