नई दिल्ली | मिडल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम लोगों की जेब पर भी दिखने लगा है। युद्ध की आशंका और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इसकी कीमतों में ऐतिहासिक तेजी दर्ज की गई है।
3 मार्च को बाजार खुलते ही सोने के दामों में जोरदार उछाल देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 5,358 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। वहीं भारतीय वायदा बाजार (MCX) में 24 कैरेट सोने की कीमत 2.5 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 1,66,199 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई। शाम के कारोबार में यह भाव बढ़कर 1,67,471 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर को भी छू गया।
दिल्ली, चेन्नई सहित कई प्रमुख शहरों में सोने के दाम मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर चुके हैं। सर्राफा बाजार में ग्राहकों और निवेशकों के बीच खरीदारी को लेकर हलचल देखी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार कीमतों में इस तेजी के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। पहला, युद्ध जैसी स्थिति में निवेशक शेयर बाजार के जोखिम से बचकर सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं। दूसरा, होरमुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। तीसरा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई का दबाव बढ़ रहा है, जिससे सोने की मांग मजबूत हुई है। चौथा, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के कारण सोने का आयात महंगा हो रहा है, जिसका सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान-इजरायल के बीच तनाव कम नहीं हुआ और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले समय में सोना 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजरें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और वैश्विक नीतिगत फैसलों पर टिकी हुई हैं।