Summer Express, गुरुग्राम | खाद्य आपूर्ति विभाग में कथित रिश्वतखोरी और राशन डिपो संचालकों से कमीशन वसूली के मामले में गुरुग्राम के पूर्व जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) अनिल कुमार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है। इससे पहले अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अनिल कुमार की ओर से अधिवक्ता सतपाल यादव ने अदालत में पक्ष रखा। वहीं शिकायतकर्ता की ओर से पहले की सुनवाई में यह दलील दी गई थी कि मामले में पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं और आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।
एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने इस मामले की जांच पूरी कर पूर्व डीएफएससी अनिल कुमार, सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी (एएफएसओ) विजय टांक और विभागीय निरीक्षक प्रेम पूर्ण सिंह के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत ने आरोपितों को चालान की प्रतियां उपलब्ध कराते हुए आगे की सुनवाई के लिए तारीख तय की है।
दरअसल, मदनपुरी निवासी राशन डिपो संचालक रूपेश अरोड़ा ने एसीबी को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि विभाग के कुछ अधिकारी डिपो होल्डरों से अवैध रूप से कमीशन वसूलते हैं। शिकायत में कहा गया कि अधिकारी करीब 10 प्रतिशत तक कमीशन की मांग करते थे।
आरोप है कि मार्च 2024 में अनिल कुमार ने शिकायतकर्ता पर दबाव बनाकर रिश्वत के तौर पर एक आईफोन 15 प्रो और एप्पल वॉच ली थी। इसके अलावा एएफएसओ विजय टांक पर 35 हजार रुपये और निरीक्षक प्रेम पूर्ण सिंह पर 56 हजार रुपये लेने के आरोप भी लगाए गए थे।
एसीबी ने 11 जुलाई 2024 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान नवंबर 2025 में अनिल कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। अब हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद मामले की आगे की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी।