Summer express, चंडीगढ़ | चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हरियाणा के कांग्रेस के पूर्व विधायक धर्म सिंह छोकर को बड़ा झटका देते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपों की गंभीरता, वित्तीय लेन-देन की प्रकृति और जांच में सामने आए साक्ष्यों को देखते हुए इस चरण पर आरोपी को जमानत देना उचित नहीं होगा।
यह मामला गुरुग्राम से जुड़े मूल अपराधों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग जांच से संबंधित है। सुनवाई जस्टिस त्रिभुवन दहिया की अदालत में हुई। यह केस महिरा समूह की एक कंपनी से जुड़ी किफायती हाउसिंग परियोजना से संबंधित है, जिस पर याचिकाकर्ता और उसके परिवार का नियंत्रण बताया गया है। आरोप है कि इस परियोजना में घर खरीदारों से एकत्र की गई बड़ी राशि का गबन और दुरुपयोग किया गया।
ईडी के अनुसार, याचिकाकर्ता धर्म सिंह छोकर पर सह-आरोपियों के साथ मिलकर लगभग 616 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय को अवैध तरीके से इस्तेमाल करने का आरोप है। वहीं, बचाव पक्ष ने दलील दी कि वह वरिष्ठ नागरिक हैं, जांच में सहयोग कर रहे हैं और मुकदमे की सुनवाई में लंबा समय लग सकता है, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।
हालांकि प्रवर्तन निदेशालय ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं और जांच के दौरान याचिकाकर्ता का आचरण भी संदिग्ध रहा है। ईडी ने यह भी बताया कि कई बार अदालत में पेश न होने पर उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे। गिरफ्तारी से बचने के प्रयासों के दौरान वह अपने आवास से अनुपस्थित पाए गए और बाद में दिल्ली के एक होटल से भागने की कोशिश करते समय गिरफ्तार किया गया।
अदालत ने रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि आरोपी परियोजना से जुड़ी कई कंपनियों में सक्रिय भूमिका निभा रहा था और मामले में उसकी संलिप्तता प्रथम दृष्टया स्पष्ट होती है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी।