Summer express/शिमला, संजू -:चार राज्यों के हालिया चुनाव परिणामों के बाद सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने केंद्र सरकार और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश का लोकतंत्र कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में सत्ता पक्ष का ध्यान केवल सरकार बनाने और गिराने की रणनीतियों तक सीमित रह गया है, जबकि जनता के मुद्दे पीछे छूटते जा रहे हैं।
राठौर ने आरोप लगाया कि चुनावों से पहले केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों—ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग—का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने के लिए करती है। उनके अनुसार, जो भी नेता भाजपा के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे किसी न किसी तरीके से निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति हाल ही में हुए चुनावों में भी साफ दिखाई दी, खासकर पश्चिम बंगाल में इस तरह की कार्रवाई पहले से जारी रही है।उन्होंने एस.आई.आर. (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि इसका विरोध सभी विपक्षी दलों ने किया था। राठौर के मुताबिक, इस प्रक्रिया के तहत लगभग 25 लाख वोट हटाए गए, जो भाजपा की जीत का एक अहम कारण बन सकता है। उन्होंने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि उसकी भूमिका पक्षपातपूर्ण नजर आ रही है।
राठौर ने कहा कि राहुल गांधी पहले ही इस मुद्दे को तथ्यों के साथ उठा चुके हैं, लेकिन भाजपा और निर्वाचन आयोग दोनों ही इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब यह स्थिति बन गई है कि लोकतंत्र में कौन वोट देगा, यह भी भाजपा तय कर रही है। “जो वोट उनके पक्ष में हैं, उन्हें जोड़ा जा रहा है और जो विरोध में हैं, उन्हें हटाया जा रहा है,” उन्होंने कहा।उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के प्रवक्ता खुले तौर पर निर्वाचन आयोग का बचाव करते हैं, जिससे उसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर और अधिक सवाल खड़े होते हैं। राठौर ने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले चुनावों की पारदर्शिता पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।आर्थिक मुद्दों पर भी उन्होंने केंद्र सरकार को घेरा। राठौर का कहना है कि चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का फोकस केवल चुनाव जीतने पर है और आम जनता की समस्याओं से उसका कोई सरोकार नहीं है।
इसके अलावा, उन्होंने भाजपा के गठबंधन सहयोगियों के साथ व्यवहार पर भी सवाल उठाए। उदाहरण देते हुए उन्होंने नीतीश कुमार का जिक्र किया और कहा कि पहले उनके साथ मिलकर सरकार बनाई गई और बाद में रणनीति के तहत उन्हें अलग कर दिया गया। उन्होंने महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन का भी उल्लेख किया और कहा कि सत्ता हासिल करने के लिए राजनीतिक चालें चली जा रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी राठौर ने केंद्र सरकार को घेरा और कहा कि भारत की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने दावा किया कि वैश्विक मंचों पर भारत को लेकर नकारात्मक टिप्पणियां हो रही हैं, लेकिन सरकार इस पर प्रभावी जवाब देने में असफल रही है।
कुल मिलाकर, राठौर के इन आरोपों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है और आने वाले समय में इस पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।