Summer express, सुन्दर कुंडू , पलवल। अनाज मंडियों में गेहूं खरीद प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब साइलो गोदामों में गेहूं उतारने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आढ़तियों ने आरोप लगाया है कि साइलो गोदाम में गेहूं से भरे ट्रकों को मनमाने तरीके से वापस लौटाया जा रहा है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
आढ़तियों का कहना है कि गोदाम प्रबंधन गेहूं में अधिक नमी और कीड़े होने का हवाला देकर ट्रकों को खाली नहीं कर रहा। साथ ही उन्होंने गोदाम में रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका दावा है कि जो लोग पैसे देते हैं, उनके खराब गुणवत्ता वाले गेहूं को भी स्वीकार कर लिया जाता है।
हथीन अनाज मंडी के आढ़ती सतपाल ने बताया कि उनकी गेहूं से भरी गाड़ी साइलो गोदाम पहुंची थी, लेकिन उसे उतारने से मना कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके सामने सैंपलिंग तक नहीं की गई और मनमाने ढंग से गेहूं में खराबी बताकर उसे रिजेक्ट कर दिया गया।
सतपाल ने कहा कि गोदाम में खराब और सड़ा हुआ गेहूं भी लिया जा रहा है, जबकि अच्छी गुणवत्ता वाले गेहूं को रिश्वत न देने की वजह से वापस किया जा रहा है। उन्होंने दोबारा सैंपलिंग की मांग भी उठाई, लेकिन अधिकारियों ने उसे मानने से इनकार कर दिया।
आढ़ती का कहना है कि इस समस्या को लेकर उच्च अधिकारियों को भी शिकायत दी गई है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को डेढ़ महीने बाद भी अपनी फसल का पूरा भुगतान नहीं मिल पाया है और सरकार केवल दावे कर रही है।
वहीं साइलो गोदाम के डिप्टी मैनेजर हर्षित दुबे ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने बताया कि गोदाम में आधुनिक वैज्ञानिक लैब के जरिए गेहूं की गुणवत्ता की जांच की जाती है। लैब रिपोर्ट के आधार पर ही गेहूं को स्वीकार या रिजेक्ट किया जाता है।
उन्होंने कहा कि साइलो में हजारों टन अनाज स्टोर किया जाता है और यदि खराब गुणवत्ता वाला गेहूं रखा जाए तो पूरा स्टॉक प्रभावित हो सकता है। इसलिए केवल मानकों पर खरा उतरने वाला गेहूं ही गोदाम में लिया जाता है।