Summer express, पानीपत। हरियाणा के पानीपत में सरकारी दस्तावेजों में जालसाजी का बड़ा मामला सामने आया है। वार्ड नंबर-6 की भाजपा पार्षद कोमल पांचाल के फर्जी हस्ताक्षर और नकली मोहर का इस्तेमाल कर रिहायशी प्रमाण पत्र तैयार किए जाने का खुलासा हुआ है। मामले में पुलिस ने चार कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ, जब नूरवाला क्षेत्र का एक कंप्यूटर सेंटर संचालक कुछ दस्तावेज सत्यापन के लिए पार्षद कोमल पांचाल के पास लेकर पहुंचा। दस्तावेजों की जांच के दौरान पार्षद ने पाया कि फाइलों पर उनके नाम की मोहर लगी हुई थी और हस्ताक्षर भी किए गए थे, जबकि उन्होंने कभी उन कागजात पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पार्षद और उनके पति तरुण पांचाल ने अपने स्तर पर जांच शुरू की। जांच में एक संगठित गिरोह के सक्रिय होने की आशंका सामने आई। शिकायत के मुताबिक, मोनू चौहान नाम का व्यक्ति इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक बताया जा रहा है, जो खुद भी एक सीएससी केंद्र चलाता है।
आरोप है कि सतपाल नामक व्यक्ति लोगों को दस्तावेज बनवाने के लिए अलग-अलग सीएससी केंद्रों तक पहुंचाता था। इस नेटवर्क में नूरवाला की कमलजीत कौर, तहसील कैंप के सौरव और नगर निगम के पास स्थित एक अन्य केंद्र संचालक शर्मा की भी संलिप्तता सामने आई है। बताया जा रहा है कि ये लोग मिलकर फर्जी मोहर और जाली हस्ताक्षरों के जरिए दस्तावेज तैयार कर सरकारी पोर्टल पर अपलोड करते थे।
पार्षद कोमल पांचाल ने पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में आशंका जताई है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय हो सकता है और अब तक बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए जा चुके होंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल जनप्रतिनिधि के हस्ताक्षरों का दुरुपयोग नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ गंभीर धोखाधड़ी है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के जरिए अब तक कितने फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और क्या इसमें किसी अन्य सरकारी कर्मचारी की भी भूमिका है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत केंद्रों से ही सरकारी दस्तावेज बनवाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें।