करनाल-: NEET-UG परीक्षा से जुड़ी पेपर लीक की चर्चाओं के बाद करनाल में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है। मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक कठिन मेहनत और अनुशासन के साथ परीक्षा की तैयारी की थी, लेकिन अब सामने आ रही खबरों ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर दिया है। कई छात्र दोबारा परीक्षा की संभावना को लेकर तनाव में दिखाई दे रहे हैं।
“कड़ी मेहनत के बाद भी भविष्य को लेकर चिंता”
परीक्षा देकर लौटे विद्यार्थियों ने बताया कि उन्होंने पूरे साल अपनी पढ़ाई पर फोकस किया और व्यक्तिगत जीवन की कई चीजों से समझौता किया। ऐसे में पेपर लीक जैसी खबरों ने उनके आत्मविश्वास को प्रभावित किया है। छात्रों का कहना है कि एक बार बड़े मानसिक दबाव के बीच परीक्षा देना ही चुनौतीपूर्ण होता है, इसलिए दोबारा उसी प्रक्रिया से गुजरने का विचार उन्हें परेशान कर रहा है।
NTA की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले के बाद परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था NTA की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि देश की प्रमुख मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सुरक्षा और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर होता है, तो इसका असर लाखों छात्रों के भविष्य और मनोबल पर पड़ता है।
कोचिंग संस्थानों के सामने भी चुनौती
करनाल के जेनेसिस कोचिंग क्लासेज के मैनेजिंग डायरेक्टर जितेंद्र अहलावत ने बताया कि पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद अभिभावकों के लगातार फोन आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बच्चे मानसिक रूप से असहज महसूस कर रहे हैं और संभावित दोबारा परीक्षा को लेकर चिंतित हैं। साथ ही नए बैच की पढ़ाई शुरू होने के कारण संस्थानों के सामने भी स्थिति संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
“लंबी तैयारी के बाद बच्चों का मनोबल टूटता है”
जितेंद्र अहलावत ने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि छात्र कई वर्षों तक लगातार मेहनत करते हैं और ऐसे मामलों का सबसे अधिक असर उन्हीं पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि शिक्षक लगातार विद्यार्थियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
“पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी”
उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित एजेंसियों को निष्पक्ष निर्णय लेना चाहिए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना जरूरी है, ताकि मेहनत करने वाले छात्रों का विश्वास कायम रह सके।