Summer express, अंकुर कपूर, अंबाला। पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने हरियाणा में सहकारी परिवहन समितियों की चिंता बढ़ा दी है। अंबाला सेंट्रल बस स्टैंड स्थित कार्यालय में आयोजित दी सहकारी परिवहन कल्याण समिति की बैठक में बस संचालकों ने कहा कि यदि जल्द किराया बढ़ोतरी नहीं की गई तो परिवहन व्यवस्था आर्थिक संकट में आ सकती है।
बैठक में समिति के पदाधिकारियों और निजी बस संचालकों ने सरकार से मांग की कि हरियाणा में बस किराया पड़ोसी राज्यों के बराबर किया जाए, ताकि बढ़ती लागत के बीच परिवहन सेवाओं को सुचारु रूप से चलाया जा सके।
समिति के अनुसार, अंबाला जिले में सहकारी परिवहन समितियों की करीब 76 बसें विभिन्न रूटों पर संचालित हो रही हैं। इनमें अंबाला छावनी से नारायणगढ़, अंबाला शहर से नारायणगढ़, छावनी से जगाधरी, पिंजौर, पंचकूला और अन्य मार्ग शामिल हैं।
बस संचालकों का कहना है कि जब डीजल की कीमत करीब 68 रुपये प्रति लीटर थी, तब सरकार ने लोकल रूटों पर बस किराए में बढ़ोतरी की थी। बाद में वर्ष 2021 में पेट्रोल 103 रुपये और डीजल 89 रुपये प्रति लीटर पहुंचने पर भी किराया बढ़ाया गया था, लेकिन अब डीजल करीब 96 रुपये प्रति लीटर होने के बावजूद किराए में कोई संशोधन नहीं किया गया।
दी सहकारी परिवहन कल्याण समिति के प्रधान रामनाथ राणा ने बताया कि हरियाणा में प्रति किलोमीटर बस किराया अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में औसतन एक रुपये प्रति किलोमीटर किराया लिया जाता है, जबकि उत्तर प्रदेश में 1.30 रुपये, पंजाब में 1.45 रुपये, हिमाचल प्रदेश में 1.50 रुपये और जम्मू-कश्मीर में करीब 1.40 रुपये प्रति किलोमीटर किराया वसूला जाता है।
बस संचालकों का कहना है कि डीजल, वाहन मेंटेनेंस, कर्मचारियों के वेतन और अन्य परिचालन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में मौजूदा किराए पर बसों का संचालन घाटे का सौदा बनता जा रहा है।
रामनाथ राणा ने सरकार से आर्थिक सहायता की भी मांग की। उन्होंने कहा कि हरियाणा रोडवेज को सरकार द्वारा घाटे की भरपाई के लिए आर्थिक सहयोग दिया जाता है, जबकि सहकारी और निजी बस संचालक भी जनता को परिवहन सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। ऐसे में सरकार को उनकी ओर भी मदद का हाथ बढ़ाना चाहिए, ताकि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित न हो।
बैठक में निजी बस संचालक समिति के सदस्य सुरेंद्र राजू सहित कई संचालकों ने भी जल्द किराया संशोधन की आवश्यकता पर जोर दिया।