Summer express/शिमला, संजू -: नगर निगम शिमला की मासिक बैठक के दौरान हुए हंगामे पर महापौर सुरेंद्र चौहान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके लिए निर्धारित मर्यादाओं का पालन करना भी जरूरी है। नगर निगम हाउस को उन्होंने “मिनी विधानसभा” बताते हुए कहा कि इसकी गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
महापौर ने बताया कि शुक्रवार को नगर निगम की मासिक बैठक शांतिपूर्ण ढंग से संचालित हो रही थी। बैठक शुरू होने से पहले सीटू (CITU) से जुड़े कुछ कार्यकर्ता निगम हाउस के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की बात पहले ही सुन ली गई थी, इसलिए बैठक के दौरान इस प्रकार का प्रदर्शन आवश्यक नहीं था।सुरेंद्र चौहान के अनुसार, बाद में कुछ प्रदर्शनकारी जबरन सदन के भीतर पहुंच गए और नारेबाजी कर कार्यवाही में व्यवधान डालने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्षदों से संयम बनाए रखने और पुलिस को स्थिति संभालने के लिए अपना दायित्व निभाने को कहा।मेयर ने पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि सदन के भीतर प्रवेश करने वालों में सफाई मित्रों का कोई प्रतिनिधि नजर नहीं आया। ऐसे में यह जांच का विषय है कि सफाई कर्मचारियों के नाम पर सदन में प्रवेश कर हंगामा करने वाले लोग आखिर कौन थे।सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर भी महापौर ने अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि वीडियो को भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। उनके मुताबिक उन्होंने केवल पार्षदों को सदन के भीतर आने के लिए कहा था और पुलिस से यह पूछा था कि वे अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभा रहे हैं या नहीं।उन्होंने कहा कि नगर निगम के इतिहास में पहली बार सदन की कार्यवाही के दौरान इस तरह का व्यवधान देखने को मिला है। लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।महापौर ने यह भी कहा कि सफाई मित्रों की अधिकांश मांगों पर पहले ही सहमति बन चुकी है। जिन कर्मचारियों को एस्मा (ESMA) के तहत हटाया गया था, उनकी पुनर्नियुक्ति कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय में लंबित मामलों से जुड़ा विषय है। उन्होंने दोहराया कि सदन में घुसकर हंगामा करने वालों की पहचान और भूमिका की जांच की जानी चाहिए।