Summer express/शिमला, संजू-: हिमाचल प्रदेश के राजस्व एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा है कि कोविड-19 महामारी के दौरान बंद हुआ भारत-तिब्बत (चीन) व्यापार एक बार फिर शुरू होने की दिशा में तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि किन्नौर जिले के शिपकी ला दर्रे के माध्यम से होने वाले इस पारंपरिक व्यापार को 1 जून से बहाल करने की तैयारी है और इस संबंध में चीनी अधिकारियों के साथ आवश्यक सहमति भी बन चुकी है। इसके अलावा उन्होंने पंचायत और शहरी निकाय चुनावों को लेकर भाजपा द्वारा किए जा रहे दावों पर भी तीखा जवाब दिया तथा आपदा राहत राशि के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा।
मीडिया से बातचीत के दौरान जगत सिंह नेगी ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण भारत और तिब्बत के बीच सीमित सीमा व्यापार पूरी तरह बंद हो गया था, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों के व्यापारियों और स्थानीय लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। अब परिस्थितियां सामान्य होने के बाद व्यापार को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि शिपकी ला के माध्यम से होने वाले इस व्यापार के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं और इच्छुक व्यापारियों के परमिट भी तैयार हैं।नेगी ने बताया कि पिछले वर्ष पहली बार आम नागरिकों को शिपकी ला तक जाने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद व्यापार बहाली को लेकर लगातार प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों के साथ बातचीत सकारात्मक रही है और दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद अब 1 जून से व्यापार शुरू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत चुनावों की प्रक्रिया के चलते कुछ प्रशासनिक व्यस्तताएं रहीं, जिसके कारण समय लगा, लेकिन अब व्यापारी अपने दस्तावेजों और परमिट के साथ आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
यह चुनाव सत्ता का ‘सेमीफाइनल’ नहीं,चुनाव हाईजैक के बयान भाजपा पर तीखा प्रहार
पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों को लेकर भाजपा द्वारा किए जा रहे दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए नेगी ने कहा कि इन चुनावों को विधानसभा चुनावों का “सेमीफाइनल” बताना केवल राजनीतिक बयानबाजी है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव किसी राजनीतिक दल के चुनाव चिन्ह पर नहीं लड़े जाते, बल्कि गांवों में आपसी सहमति, भाईचारे और स्थानीय मुद्दों के आधार पर चुनाव होते हैं। ऐसे में इन्हें किसी पार्टी की जीत या हार के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।उन्होंने कहा कि प्रदेश में 137 से अधिक पंचायतें निर्विरोध चुनी गई हैं, जो लोकतांत्रिक परंपराओं और सामाजिक समरसता का उदाहरण है। इसके अलावा चुनावों में 81 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया, जो लोगों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में गहरी आस्था को दर्शाता है। भाजपा द्वारा चुनावों को “हाईजैक” किए जाने के आरोपों पर नेगी ने कहा कि यदि विपक्ष के पास कोई ठोस प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। केवल आरोप लगाने से लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पूरे प्रदेश में चुनाव शांतिपूर्ण, पारदर्शी और संवैधानिक व्यवस्था के तहत संपन्न हुए हैं।
राजस्व मंत्री ने आपदा राहत के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री द्वारा हिमाचल प्रदेश के लिए 1500 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की गई थी, लेकिन राज्य को अब तक उस राशि का लाभ नहीं मिल पाया है।उन्होंने आरोप लगाया कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित प्रदेश को अपेक्षित सहयोग नहीं दिया गया।
नेगी ने कहा कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने राहत एवं पुनर्वास के नियमों में बदलाव कर प्रभावित परिवारों को पहले की तुलना में कहीं अधिक सहायता उपलब्ध करवाई है। उन्होंने बताया कि जिन परिवारों के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, उन्हें अब 8 लाख रुपये तक की सहायता दी जा रही है, जबकि केंद्र की ओर से निर्धारित सहायता राशि 1.50 लाख रुपये है। इसी प्रकार आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए पहले जहां केवल 6 हजार रुपये मिलते थे, वहीं अब एक लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जा रही है।उन्होंने बताया कि फसल नुकसान पर मुआवजे की राशि भी बढ़ाई गई है। पहले प्रति बीघा 300 रुपये दिए जाते थे, जिसे बढ़ाकर अब 3 हजार रुपये प्रति बीघा कर दिया गया है। इसके साथ ही पशुधन हानि के मामलों में भी नियमों को सरल बनाया गया है ताकि प्रभावित पशुपालकों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके। नेगी ने दावा किया कि इस प्रकार की राहत व्यवस्था देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में अधिक प्रभावी और उदार है।
इस अवसर पर उन्होंने स्पीति घाटी के ऐतिहासिक ताबो क्षेत्र में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय योग एवं ध्यान शिविर का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका आधारित एक आध्यात्मिक संस्था द्वारा आयोजित 10 दिवसीय विशेष मेडिटेशन और योग कार्यक्रम में भारत, अमेरिका, ब्रिटेन सहित विभिन्न देशों से 150 से अधिक साधक भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान योग, ध्यान और बौद्ध शिक्षाओं से जुड़े सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। संस्था सामाजिक और धर्मार्थ गतिविधियों के तहत मेडिकल कैंप तथा बौद्ध मठों की सहायता जैसे कार्य भी कर रही है। प्रशासन की ओर से प्रतिभागियों की सुविधा के लिए परिवहन सहित आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध करवाई गई हैं।