दलजीत विक्की| लुधियाना
समर न्यूज
पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी राजनीतिक रणनीति का केंद्र अब राज्य की सबसे बड़ी और सबसे निर्णायक मालवा बेल्ट को बना लिया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि पार्टी ग्रामीण पंजाब में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए जट्ट सिख नेतृत्व को आगे लाने की तैयारी कर रही है। इसी रणनीति के तहत वरिष्ठ नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, केवल सिंह ढिल्लों, हरजीत सिंह ग्रेवाल और जैसे प्रभावशाली चेहरों को संगठन और चुनावी अभियान के तहत बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा अच्छी तरह समझती है कि पंजाब की सत्ता की राह मालवा से होकर गुजरती है। राज्य की करीब 69 विधानसभा सीटें इसी क्षेत्र में आती हैं। यही कारण है कि पार्टी अब शहरी राजनीति से आगे बढ़कर गांवों, किसानों और जट्ट सिख समाज के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने के मिशन पर काम कर रही है।
भाजपा लंबे समय से पंजाब में अपने जनाधार का विस्तार करने की कोशिश कर रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि बिना मजबूत जट्ट सिख नेतृत्व के ग्रामीण पंजाब में प्रभावी राजनीतिक उपस्थिति बनाना आसान नहीं है। रवनीत सिंह बिट्टू,केवल सिंह ढिल्लों और हरजीत सिंह ग्रेवाल ऐसे चेहरे हैं जिनकी पहचान गांवों और किसान समाज में है। भाजपा ग्रामीण मतदाताओं को यह संदेश देना चाहेगी कि पार्टी अब पंजाब की सामाजिक और राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप अपनी रणनीति बना रही है।कृषि कानून आंदोलन के बाद भाजपा को पंजाब के ग्रामीण इलाकों में भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। अब पार्टी उस छवि को बदलने की कोशिश में जुटी है। किसानों से संवाद बढ़ाने, गांवों में लगातार संपर्क अभियान चलाने और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जट्ट सिख नेताओं को आगे लाने का उद्देश्य किसानों और ग्रामीण समाज के बीच विश्वास बहाल करना भी हो सकता है।
{मालवा क्यों है सत्ता की चाबी: पंजाब की राजनीति में मालवा सबसे प्रभावशाली क्षेत्र माना जाता है। मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के लिए इस क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन लगभग जरूरी माना जाता है। पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में 69 इसी क्षेत्र में हैं। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल भी हमेशा मालवा को अपनी चुनावी रणनीति का केंद्र बनाते रहे हैं। भाजपा भी अब इसी क्षेत्र में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरती दिखाई दे रही है जिसके चलते लोकसभा चुनावो के बाद रवनीत बिट्टू को केंद्र में राज्यमंत्री, केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब प्रधान, और हरजीत सिंह ग्रेवाल को भारत सरकार में अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन नियुक्त किया है।
{बूथ से लेकर गांव तक होगा संगठन मजबूत: भाजपा बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने, युवाओं और किसानों को जोड़ने, पंचायत स्तर तक सक्रिय नेटवर्क तैयार करने और गांव-गांव जनसंपर्क अभियान चलाने की योजना पर काम कर रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि आगामी विधानसभा चुनाव तक मालवा में भाजपा की मजबूत राजनीतिक मौजूदगी दिखाई दे। यदि भाजपा जट्ट सिख नेतृत्व को प्रमुखता देकर ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने में सफल रहती है तो इसका सीधा असर पंजाब की चुनावी राजनीति पर पड़ सकता है। इससे कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में भाजपा की संगठनात्मक नियुक्तियां और चुनावी अभियान पंजाब की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
{नई रणनीति के संकेत: भाजपा की नई रणनीति साफ संकेत देती है कि पार्टी अब पंजाब में केवल शहरी वोट बैंक तक सीमित नहीं रहना चाहती। जट्ट सिख नेतृत्व को आगे कर ग्रामीण पंजाब, किसान वर्ग और मालवा की निर्णायक सीटों पर प्रभाव बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। यदि यह रणनीति संगठनात्मक स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू होती है तो आगामी विधानसभा चुनाव में पंजाब की सियासत में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक चर्चाओं और संभावित रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।