Summer express/कांगड़ा, राहुल-:कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार परियोजना से प्रभावित परिवारों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। गुरुवार को सनौरा पंचायत सहित विभिन्न प्रभावित गांवों के ग्रामीणों, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं, ने उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत कराया और मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आरएंडआर) के तहत मिलने वाली सहायता राशि जल्द जारी करने, घर खाली करने के लिए कम से कम एक वर्ष का समय देने और सभी प्रभावित क्षेत्रों में मुआवजे की समान दर सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रभावित परिवारों का कहना है कि कई लोगों को भूमि और भवन का मुआवजा तो मिल चुका है, लेकिन आरएंडआर के अंतर्गत मिलने वाला डिस्टर्बेंस अलाउंस अभी तक जारी नहीं किया गया है। उनका कहना है कि इस राशि के बिना नए स्थान पर जमीन खरीदना और मकान बनाना आर्थिक रूप से संभव नहीं हो पा रहा है। इसके चलते कई परिवार असमंजस की स्थिति में हैं और भविष्य को लेकर चिंतित हैं।पूर्व प्रधान सुनीता देवी ने बताया कि वर्तमान में बरसात का मौसम होने के कारण निर्माण कार्य प्रभावित है। साथ ही निर्माण सामग्री और मजदूरों की उपलब्धता भी सीमित है। ऐसे में यदि प्रशासन जल्द घर खाली करने का निर्देश देता है तो प्रभावित परिवारों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से कम से कम एक वर्ष का अतिरिक्त समय देने की मांग दोहराई।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सनौरा, रछीयालु, इच्छी, गग्गल और अन्य प्रभावित गांवों में मुआवजे की दरों में काफी अंतर रखा गया है। उनका कहना है कि कुछ क्षेत्रों में भूमि का मूल्यांकन अधिक किया गया, जबकि अन्य गांवों में अपेक्षाकृत कम मुआवजा निर्धारित किया गया, जिससे लोगों में असंतोष है। उन्होंने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर सभी प्रभावितों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने की अपील की।
उपायुक्त हेमराज बैरवा ने प्रभावित परिवारों को आश्वस्त करते हुए कहा कि एयरपोर्ट भूमि अधिग्रहण से जुड़े प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि कानून के तहत सभी को एक समान अवधि देना संभव नहीं है, लेकिन जिन मामलों में वास्तविक आवश्यकता होगी, वहां नियमों के अनुरूप उचित राहत देने पर विचार किया जाएगा।
मुआवजे में असमानता के आरोपों पर उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण के समय लागू सर्किल रेट और तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर ही मुआवजे का निर्धारण किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रभावित व्यक्ति को निर्धारित मुआवजे पर आपत्ति है तो वह संबंधित रेफरेंस अथॉरिटी के समक्ष अपनी याचिका या आपत्ति प्रस्तुत कर सकता है। प्रशासन ने यह भी भरोसा दिलाया कि प्रभावित परिवारों की समस्याओं का संवेदनशीलता और नियमानुसार समाधान करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।