Summer express, जालंधर। लगातार हो रही बारिश ने जालंधर के ऐतिहासिक दोमोरिया पुल के पुनर्विकास कार्य पर ब्रेक लगा दिया है। पुल के नीचे पांच से छह फीट तक पानी भर जाने के कारण करीब 50 लाख रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य फिलहाल ठप हो गया है। पिछले 15 दिनों से निर्माण कार्य के चलते पुल के नीचे का मार्ग पहले ही बंद था, वहीं बीते तीन दिनों की तेज बारिश ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
पानी भरने के कारण निर्माण एजेंसियां आगे का काम शुरू नहीं कर पा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जलभराव समाप्त होने के बाद ही परियोजना की गति दोबारा शुरू हो सकेगी। दूसरी ओर, इकहरी पुल क्षेत्र में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं, जहां गंदा पानी रेलवे लाइन के नजदीक तक पहुंच गया है। ऐसे में शहरवासियों और वाहन चालकों के लिए अड्डा होशियारपुर फाटक तथा रेलवे ओवरब्रिज ही प्रमुख वैकल्पिक मार्ग रह गए हैं।
गौरतलब है कि दोमोरिया पुल का निर्माण वर्ष 1870 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान हुआ था। बीते डेढ़ सौ वर्षों में पुल की समय-समय पर मरम्मत होती रही, लेकिन इसके ढांचे को आधुनिक स्वरूप देने का कार्य पहली बार किया जा रहा है। परियोजना के तहत पुल के आसपास मजबूत सीवरेज नेटवर्क और अत्याधुनिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिससे भविष्य में जलभराव की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सके।
करीब दो महीने में पूरा होने वाली इस परियोजना की समयसीमा अब मौसम पर निर्भर हो गई है। लगातार बारिश के कारण निर्माण अवधि बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। वहीं रेलवे लाइन के नीचे स्थापित किए जाने वाले कंक्रीट स्पैन का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। ये स्पैन पिछले कई महीनों से तैयार अवस्था में रखे हुए हैं और जालंधर सिटी रेलवे स्टेशन की सेकेंड एंट्री परियोजना से भी जुड़े हैं।
50 लाख रुपये की लागत वाले इस रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट के तहत पुल क्षेत्र में पांच विशेष यूनिट स्थापित की जा रही हैं। इन यूनिटों के माध्यम से बारिश का पानी पाइपलाइन के जरिए सीधे भूमिगत संरचनाओं में भेजा जाएगा, जिससे भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके लिए कुएं जैसी गहरी संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिनमें गोलाकार रिंग और सुरक्षा जालियां लगाई जाएंगी ताकि केवल पानी ही नीचे पहुंचे और कचरा अंदर न जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार दोमोरिया पुल में जमा होने वाले पानी का अधिकांश हिस्सा वर्षा जल होता है, जिसे इस परियोजना के जरिए जमीन में पुनर्भरण किया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद संबंधित कंपनी अगले तीन वर्षों तक इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी संभालेगी, ताकि सिस्टम की नियमित सफाई और कार्यक्षमता बनी रहे।