15 July, 2025
हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष का मानसून एक बार फिर कहर बनकर टूटा है। प्रदेश में बादल फटने और भारी वर्षा से व्यापक जन-धन की हानि हुई है। अब तक 61 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक हज़ार करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का प्रारंभिक आंकलन किया गया है।
मौसम के कहर से सड़क, जल और बिजली व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। मंगलवार तक प्रदेश में 220 सड़कें पूरी तरह से अवरुद्ध रहीं, जिन्हें खोलने के लिए लोक निर्माण विभाग की मशीनें लगातार काम कर रही हैं। साथ ही, 153 पेयजल परियोजनाएं बाधित हुई हैं और कई बिजली ट्रांसफॉर्मरों को भी नुकसान पहुंचा है।सबसे अधिक नुकसान मंडी जिले में हुआ है, जहां सड़कों को खोलने के लिए 170 मशीनें तैनात की गई हैं। राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं।
राजस्व मंत्री जगत नेगी ने जानकारी दी कि मंडी में बादल फटने से भारी नुकसान हुआ है। कई घर और सड़कें पूरी तरह से बह गई हैं। सरकार द्वारा राहत कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और प्रभावित लोगों की मदद की जा रही है।
भांग की खेती को लेकर अहम कदम:
राजस्व मंत्री ने यह भी बताया कि भांग की खेती को कानूनी रूप देने के लिए एक मसौदा तैयार किया गया है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम नशे को बढ़ावा देने के लिए नहीं, बल्कि मेडिकल और औद्योगिक उपयोग के लिए उठाया जा रहा है। भांग की खेती के लिए लाइसेंस जारी किए जाएंगे, और संबंधित क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी की जाएगी। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और सरकार को भी राजस्व प्राप्त होगा।
शिमला में सेब के पेड़ कटान पर दी सफाई:
राजस्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि शिमला के ऊपरी क्षेत्रों में वन भूमि पर सेब के पेड़ों का कटान सरकार का निर्णय नहीं है, बल्कि यह कार्य हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार वन विभाग द्वारा किया जा रहा है। सरकार केवल न्यायालय के आदेशों का पालन कर रही है।