चंडीगढ़ | प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रधान सचिव रहे रिटायर्ड IAS अधिकारी मुरारी लाल तायल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने तायल की चंडीगढ़, नई दिल्ली और गुरुग्राम स्थित 9 अचल संपत्तियां कुर्क की हैं। साथ ही, उनके नाम पर मौजूद ₹14.06 करोड़ के बैंक बैलेंस को भी अटैच किया गया है।
ईडी ने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की। ईडी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में 2 घर और 7 फ्लैट शामिल हैं। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में की गई है।
यह जांच सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर की जा रही है, जिसमें मुरारी लाल तायल पर आरोप है कि उन्होंने 6 मार्च 2005 से 31 दिसंबर 2014 के बीच विभिन्न पदों पर रहते हुए अपनी पत्नी सविता तायल और बेटे कार्तिक तायल के साथ मिलकर अवैध संपत्ति अर्जित की।
ईडी ने तायल परिवार के बैंक खातों, आयकर रिकॉर्ड और शेयर बाजार लेनदेन की भी गहन जांच की। इसमें खुलासा हुआ कि करीब ₹14.06 करोड़ की संपत्तियां उन स्रोतों से अर्जित की गईं, जिनका कोई वैध आधार नहीं था।
कैसे शुरू हुई कार्रवाई?
इस मामले की शुरुआत 2015 में हुई, जब बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद सीबीआई ने गुरुग्राम के मानेसर जमीन घोटाले को लेकर 12 अगस्त 2015 को एफआईआर दर्ज की। इसके बाद सीबीआई ने प्रदेश के कई वरिष्ठ अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की, जिनमें एम.एल. तायल का नाम भी शामिल था।
2017 में सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुरारी लाल तायल, उनकी पत्नी सविता तायल और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ एक अलग एफआईआर दर्ज की थी।
तायल परिवार का बैकग्राउंड
एमएल तायल 1976 बैच के IAS अधिकारी रहे हैं और अपने सेवाकाल के दौरान कई अहम पदों पर तैनात रहे। 2005 से 2009 तक वे भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पहले कार्यकाल में प्रधान सचिव के रूप में कार्यरत थे और बेहद प्रभावशाली माने जाते थे। रिटायरमेंट के बाद उन्हें केंद्र सरकार ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) में सदस्य नियुक्त किया, जहां वे 2009 से 2014 तक तैनात रहे।
उनकी पत्नी सविता तायल 2012 में सरकारी कॉलेज से प्रिंसिपल के पद से रिटायर हुईं। इसके बाद हुड्डा सरकार ने उन्हें हरियाणा लोक सेवा आयोग का सदस्य नियुक्त किया, जहां से वे 2016 में रिटायर हुईं।