10 July, 2025
सावन 2025 का महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए सबसे उत्तम समय माना गया है। इस पूरे माह श्रद्धालु व्रत रखते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं और शिवलिंग का अभिषेक जल, दूध व बेलपत्र से करते हैं। लेकिन शास्त्रों में कुछ ऐसी वस्तुओं का भी उल्लेख है, जिन्हें शिव पूजा में वर्जित माना गया है। इनका प्रयोग न केवल पूजा को निष्फल कर सकता है, बल्कि इसका दुष्परिणाम भी भक्तों को भुगतना पड़ सकता है।
आइए जानते हैं वे वस्तुएं जिनसे सावन में शिव पूजन करते समय बचना चाहिए:
1. तुलसी के पत्ते – शिव को नहीं अर्पण करें
तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है, लेकिन शिवलिंग पर तुलसी चढ़ाना निषिद्ध है। शास्त्रों के अनुसार, इससे शिव पूजा का फल समाप्त हो जाता है। सावन में इस नियम का विशेष ध्यान रखें।
2. शंख से जल चढ़ाना – वर्जित है
शंख पूजा में पवित्र माना गया है, लेकिन शिवलिंग पर शंख से जल चढ़ाना मना है। यह विधि विष्णु पूजा के लिए उपयुक्त है। शिव पर जल अर्पण करने के लिए कलश या लोटे का ही प्रयोग करें।
3. कुमकुम का प्रयोग – अशुद्ध माना गया
कुमकुम का प्रयोग देवी पूजा में होता है, जैसे लक्ष्मी या दुर्गा के पूजन में। शिव पूजा में यह वर्जित है। शिवलिंग पर कुमकुम न चढ़ाएं, इसकी जगह जल, दूध, दही, घी और शहद का प्रयोग करें।
4. खंडित बेलपत्र – अर्पण न करें
हालांकि बेलपत्र शिवजी को अत्यंत प्रिय है, लेकिन खंडित, फटा या सूखा बेलपत्र नहीं चढ़ाना चाहिए। तीन पत्तियों वाला साबुत, ताजा और स्वच्छ बेलपत्र ही अर्पित करें।
5. उबला हुआ दूध – नहीं चढ़ाएं
शिवलिंग पर उबला हुआ दूध चढ़ाना वर्जित है। केवल ठंडा, कच्चा और शुद्ध दूध ही भगवान शिव को अर्पित करें, अन्यथा पूजा निष भगवान शिव को अर्पित करें, अन्यथा पूजा निष्फल हो सकती है।
6. केतकी का फूल – पूर्णतः वर्जित
शास्त्रों के अनुसार, एक बार केतकी पुष्प ने भगवान शिव के समक्ष झूठ बोला था। इसी कारण इसे शिव पूजा से निष्कासित कर दिया गया। इसकी जगह गुलाब, कमल जैसे शुद्ध फूल अर्पित करें।