गन्नौर |सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर सरकार के वादे और दावे ज़मीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहे हैं। गन्नौर के गांव भाखरपुर स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय की हालत इसे साफ तौर पर बयां करती है, जहां पहली से पांचवीं कक्षा तक के 57 छात्र केवल एक ही शिक्षक के भरोसे हैं। लंबे समय से बाकी शिक्षक पद रिक्त पड़े हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है।
विद्यालय के इकलौते शिक्षक राजेश कुमार बीते एक साल से अकेले ही स्कूल का संचालन कर रहे हैं। वे बाल वाटिका से लेकर दूसरी कक्षा तक के बच्चों को एक साथ पढ़ाते हैं, जबकि तीसरी से पांचवीं कक्षा के लिए अलग से पढ़ाई करवाते हैं। चार-चार विषयों की जिम्मेदारी उठाने के साथ-साथ उन्हें मिड-डे मील, सरकारी रिकॉर्ड संधारण और अधिकारियों की बैठकों जैसे प्रशासनिक कार्य भी संभालने पड़ रहे हैं। राजेश कुमार ने बताया कि उन्हें परिवार पहचान पत्र संबंधित ड्यूटी में भी लगाया गया है, जिससे नियमित पढ़ाई प्रभावित होती है। अगर किसी दिन छुट्टी लेनी पड़ जाए, तो स्कूल पूरी तरह ठप हो जाता है।
स्कूल में स्टाफ की भारी कमी का असर छात्रों की संख्या पर भी पड़ा है। अभिभावक अपने बच्चों को पास के गांवों के स्कूलों में दाखिला दिलाने पर मजबूर हो गए हैं। स्कूल की पहचान धीरे-धीरे एक खाली इमारत जैसी बनती जा रही है। गांव के सरपंच राजेंद्र राठौर ने इस स्थिति पर नाराजगी जाहिर करते हुए विभाग पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि कभी यह स्कूल शैक्षणिक प्रतियोगिताओं में अव्वल रहता था, लेकिन अब हालत इतनी खराब है कि गांव के बच्चे ही यहां पढ़ना नहीं चाहते।
उन्होंने विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द स्कूल में दो अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति की जाए ताकि शिक्षा व्यवस्था पटरी पर लौट सके।
इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी नवीन गुलिया का कहना है कि हाल ही में हुए प्रमोशन और तबादलों के कारण कई स्कूलों में शिक्षकों की अस्थायी कमी बनी है। विभाग इस समस्या को हल करने के लिए HKRN के माध्यम से अस्थायी शिक्षकों की नियुक्ति कर रहा है। साथ ही जहां जरूरत है, वहां पास के स्कूलों से अस्थायी तौर पर स्टाफ भेजा जा रहा है ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।