Mandi, Dharamveer
ग्राम पंचायत लौंगणी के अंतर्गत आने वाला स्याठी गांव 30 जून की रात भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन की चपेट में आ गया, जिससे गांव के पांच घर पूरी तरह से जमींदोज हो गए, जबकि बाकी मकान रहने लायक नहीं बचे। गांव के सभी निवासी अब नैणा माता मंदिर के प्रांगण में अपने बच्चों और बुजुर्गों संग रातें गुजारने को मजबूर हैं।
यह कोई पहली बार नहीं है जब गांव की धरती डगमगाई हो — वर्ष 2014 में भी भारी बारिश के कारण ऐसी ही आपदा आई थी, जब ग्रामीणों ने 15 दिनों तक इसी मंदिर में शरण ली थी।
तेल की तलाश और अधूरी जानकारी:
लौंगणी पंचायत की प्रधान मीना देवी ने बताया कि 2014 की आपदा के बाद एक दल तेल की संभावना की जांच के लिए गांव पहुंचा था। उन्होंने गांव के आसपास छोटे-छोटे गड्ढे खोदकर सर्वे किया, लेकिन इसके बाद वे फिर कभी नहीं लौटे। ग्रामीणों के पास इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है।
जिंदगी भर की कमाई उजड़ गई:
प्रभावित अभिषेक कुमार ने बताया कि वर्षों की मेहनत और आईआरडीपी योजना से मिली सहायता के बाद उन्होंने घर बनाया था। धीरे-धीरे उसका विस्तार किया, लेकिन एक ही रात में सबकुछ मिट्टी में मिल गया। सुनीता देवी और मीना देवी जैसे कई परिवार अब अस्थायी तौर पर मंदिर के खुले परिसर में रह रहे हैं।
मदद की गुहार:
पीड़ितों का कहना है कि राहत सामग्री तो मिल रही है, लेकिन रहने के लिए सुरक्षित जगह की सख्त जरूरत है। प्रशासन और सरकार से उनकी मांग है कि जल्द से जल्द जमीन मुहैया करवाई जाए, ताकि वे फिर से अपने जीवन की नई शुरुआत कर सकें।
वैज्ञानिक जांच की ज़रूरत:
भूस्खलन के बाद जहां मलबा गिरा है वहां चट्टानों का ढेर साफ दिखाई देता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके घर मजबूत पत्थरों पर बने थे, लेकिन अब वे चट्टानें भी खिसक गई हैं। यह संकेत है कि इस क्षेत्र की भौगोलिक बनावट की गंभीर वैज्ञानिक जांच की आवश्यकता है। लेकिन उससे पहले ज़रूरी है कि इन लोगों को सुरक्षित पुनर्वास दिया जाए।