नई दिल्ली | जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले और इसके बाद भारतीय सेना द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से सीमा पर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई, जिनमें से कई घरों के इकलौते कमाने वाले थे। अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इन परिवारों के जख्मों पर मरहम रखते हुए एक मानवीय कदम उठाया है। उन्होंने संघर्ष में माता-पिता या घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य को खो चुके 22 बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने का फैसला किया है।
बच्चों के भविष्य की ज़िम्मेदारी उठाएंगे राहुल
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक राहुल गांधी इन बच्चों की शिक्षा का खर्च तब तक उठाएंगे जब तक वे अपनी ग्रेजुएशन पूरी नहीं कर लेते। बुधवार को इन बच्चों को पहली किस्त दी जाएगी। यह मदद उन बच्चों के लिए है जिनके परिवार अब पूरी तरह बेसहारा हो चुके हैं।
पुंछ में मुलाकात और बच्चों से संवाद
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने मई में पुंछ का दौरा किया था और उन बच्चों से मुलाकात की थी जो संघर्ष से प्रभावित हुए थे। क्राइस्ट पब्लिक स्कूल में जुड़वां बच्चों उरबा फातिमा और जैन अली से बातचीत करते हुए उन्होंने उन्हें पढ़ाई और खेल पर ध्यान देने की प्रेरणा दी थी। राहुल ने कहा था, “तुम्हें डर लग रहा होगा, लेकिन डर को मात देने का तरीका है – पढ़ाई करो, खेलो और आगे बढ़ो।”
ऑपरेशन सिंदूर के बाद की स्थिति
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। इसके जवाब में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए थे, जिनका सबसे ज्यादा असर पुंछ जिले पर हुआ। संघर्ष के चार दिनों बाद 10 मई को सीजफायर की घोषणा हुई, जिससे हालात कुछ सामान्य हुए।
बच्चों में उम्मीद की किरण
राहुल गांधी की यह पहल न सिर्फ एक संवेदनशील राजनीतिक कदम है, बल्कि यह उन अनाथ बच्चों के लिए नई उम्मीद भी है, जो जीवन के सबसे कठिन मोड़ पर खड़े हैं। अब ये बच्चे न केवल अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे, बल्कि बेहतर भविष्य की ओर भी कदम बढ़ा सकेंगे।