Dharamshala, Rahul
केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के शिक्षा संकाय में बुधवार से दस दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘सामाजिक विज्ञान में अनुसंधान पद्धति पाठ्यक्रम’ का शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा प्रायोजित है। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल रहे, जिन्होंने शोध और अध्यापन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता एवं साहित्यकार अविनाश राय खन्ना की पुस्तक ‘प्रेरणास्त्रोत – एक सफर’ का भी विमोचन किया गया।
प्रो. बंसल ने अपने संबोधन में कहा कि एआई को शिक्षक या निर्णयकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि एक सहायक टूल के रूप में अपनाना होगा, ताकि मानव की रचनात्मक और तकनीकी सोच जीवित रहे। उन्होंने कहा कि विदेशों के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जैसे केंब्रिज और ऑक्सफोर्ड ने एआई को पाठ्यक्रम का हिस्सा बना लिया है, लेकिन केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश इसे “मास्टर” नहीं, बल्कि “सहायक” के रूप में अपनाएगा।उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला के लिए देशभर से 350 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से चयन प्रक्रिया के बाद 30 शोधार्थियों को शामिल किया गया है — इनमें दस प्रतिभागी केंद्रीय विश्वविद्यालयों से, दस हिमाचल प्रदेश के विभिन्न संस्थानों से और दस अन्य राज्यों से चुने गए हैं।
प्रो. बंसल ने कहा कि कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य यह है कि शोधार्थी एआई टूल्स का उपयोग कंटेंट क्रिएशन, डेटा एनालिसिस, ई-लर्निंग और रिसर्च मेथडोलॉजी में दक्षता के साथ कर सकें। “अगर हम एआई को केवल सहायक तकनीक के रूप में लें, तो यह हमारे विचारों की मौलिकता और सृजनशीलता को और निखारेगा।कार्यशाला के संयोजक और डीन, स्कूल ऑफ एजुकेशन प्रो. विशाल सूद ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को यह सिखाया जाएगा कि एआई टूल्स को शिक्षण, अधिगम, शोध और ई-कंटेंट निर्माण में किस प्रकार से प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल कंटेंट का है, इसलिए शोधार्थियों को इन तकनीकों में पारंगत बनाना समय की मांग है।
प्रो. सूद ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य भविष्य के शिक्षकों को ऐसा प्रशिक्षण देना है, जिससे वे शिक्षा विधियों, तकनीकी योजनाओं और एआई के प्रयोग को समझते हुए विद्यार्थियों के लिए प्रभावी शिक्षण अनुभव तैयार कर सकें। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को न केवल तकनीकी ज्ञान दिया जाएगा, बल्कि उन्हें एआई की नैतिकता और सीमाओं के प्रति भी सजग किया जाएगा।कार्यशाला के दौरान देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए विशेषज्ञ एआई आधारित रिसर्च टूल्स, डेटा विश्लेषण विधियों, ई-कंटेंट निर्माण, और डिजिटल टीचिंग प्लेटफॉर्म्स पर व्याख्यान देंगे।