Shimla, 13 November
हिमाचल प्रदेश अब स्वास्थ्य और चिकित्सा पर्यटन का नया केंद्र बनने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने आयुष विभाग के माध्यम से पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली को आधुनिक शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोड़ने की पहल की है।
252 छात्रों को मिलेगा प्रवेश अवसर
अगले शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के 12 आयुर्वेदिक अस्पतालों में एक वर्षीय पंचकर्मा तकनीशियन पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। यह निर्णय न केवल राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करेगा बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खोलेगा। अब तक जहाँ केवल 36 सीटें उपलब्ध थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़ाकर 252 सीटें कर दी गई है — जो हिमाचल की स्वास्थ्य शिक्षा प्रणाली के विकास में एक ऐतिहासिक विस्तार है।राज्य के पपरोला और छोटा शिमला स्थित प्रमुख आयुर्वेदिक संस्थानों में सीटों की संख्या बढ़ाई जा रही है, साथ ही बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, मंडी, सोलन, ऊना, नाहन, नालागढ़, देहरा और रामपुर जैसे जिलों के अस्पतालों में भी यह कोर्स शुरू होगा। इससे न केवल स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण मिलेगा, बल्कि राज्य की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को भी राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।
सरकार का उद्देश्य हिमाचल की समृद्ध वनस्पतियों और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के वैज्ञानिक उपयोग के माध्यम से “समग्र स्वास्थ्य” की भावना को सशक्त बनाना है। पंचकर्म तकनीशियन तैयार कर प्रदेश न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि स्वास्थ्य पर्यटन की दृष्टि से देश-विदेश के लोगों को भी आकर्षित करेगा।यह पहल हिमाचल के लिए एक नए युग की शुरुआत है — जहाँ शिक्षा, परंपरा और रोजगार एक साथ मिलकर एक स्वस्थ और समृद्ध भविष्य का निर्माण करेंगे।