Dharamshala, Rahul
टीबी उन्मूलन की दिशा में कांगड़ा जिला प्रशासन ने एक नई और सराहनीय पहल की शुरुआत की है। “टीबी हारेगा–कांगड़ा जीतेगा” अभियान को आगे बढ़ाते हुए उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने धर्मशाला विकास खंड में टीबी रोगियों के लिए तैयार की गई पोषण किटों से भरे वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
धर्मशाला प्रदेश का पहला ऐसा ब्लॉक बन गया है जिसने पंचायतों को प्राप्त 15वें वित्त आयोग के अनुदान का उपयोग करते हुए टीबी रोगियों को पोषण किट प्रदान करने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रशासन का मानना है कि तपेदिक से जूझ रहे रोगियों को उपचार अवधि के दौरान संतुलित और ऊर्जा-समृद्ध आहार मिलना बेहद जरूरी है ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े और इलाज के नतीजे अधिक प्रभावी हों।
विकास खंड धर्मशाला के अंतर्गत कुल 27 टीबी रोगियों को पोषण किट वितरित की जाएंगी। इन किटों में शामिल हैं—4 किलोग्राम साबुत माह दाल, 5 किलोग्राम चने की दाल, 4 किलोग्राम लाल मसूर, 4 किलोग्राम मूंग दाल, 5 किलोग्राम गेहूं का आटा, 6 किलोग्राम मोंगरा चावल, 1 किलोग्राम मूंगफली, 1 किलोग्राम सोया चंक्स, 2 लीटर सरसों का तेल, स्किम्ड दूध के पैक और च्यवनप्राश। इन सभी पोषण सामग्रियों की कुल लागत 1.28 लाख रुपये आंकी गई है, जिसे पूरी तरह पंचायत स्तर के 15वें वित्त आयोग अनुदान से वहन किया गया है।
डीसी हेमराज बैरवा ने कहा कि शोध और अनुभव बताते हैं कि जिन रोगियों को नियमित पोषण सहयोग मिलता है, वे अपना इलाज समय पर और बिना रुकावट पूरा करने में सक्षम होते हैं। ऐसे रोगियों में ड्रॉपआउट के मामले भी कम देखने को मिलते हैं। इसलिए कांगड़ा प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले के प्रत्येक टीबी रोगी तक यह पोषण सहायता पहुंचे।उन्होंने यह भी बताया कि एनआरएलएम के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को “निक्षय मित्र” के रूप में जोड़ा जा रहा है ताकि वे टीबी रोगियों को लगातार परामर्श और सहायता प्रदान कर सकें। ये समूह सदस्य समुदाय में स्क्रीनिंग व फॉलोअप गतिविधियों को भी मजबूत करेंगे।डीसी बैरवा ने उम्मीद जताई कि इस पहल से टीबी उन्मूलन के अभियान को नई गति मिलेगी और कांगड़ा जिला टीबी मुक्त बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा।