Mandi, Dharamveer-:छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध मंडी शहर के व्यापक विकास को लेकर नगर निगम ने केंद्र सरकार के समक्ष 999 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार की नई शहरी चुनौती योजना के तहत प्रस्तुत किया गया है, जिसे छोटे और मध्यम श्रेणी के शहरों को विकसित करने के उद्देश्य से 1 लाख करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू किया गया है। नगर निगम मंडी के मेयर वीरेंद्र भट्ट ने बताया कि उन्होंने इस योजना के लिए तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर, राज्य मंत्री पोखन साहू और सांसद कंगना रनौत को सौंप दिया है।
मेयर के अनुसार, यदि केंद्र सरकार मंडी के लिए मांगे गए 999 करोड़ रुपये की मंजूरी देती है, तो शहर का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। प्रस्तावित परियोजनाओं में शहर के प्रमुख घाटों का तटीकरण, धार्मिक स्थलों के आसपास सौंदर्यीकरण, शहर के भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में ओवरहेड और अंडर-पाथ पुलों का निर्माण, आधुनिक स्ट्रीट लाइटिंग, सुरक्षित पैदल मार्ग और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार शामिल है। उनका कहना है कि यह योजना मंडी को एक मॉडल शहर के रूप में विकसित करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।मंडी शहर धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां ब्यास नदी और सुकेती खड्ड शहर के बीचोंबीच बहती हैं। कई छोटे-छोटे नाले भी शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हैं। ऐसे में तटीकरण और घाटों का निर्माण न सिर्फ शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिए जरूरी है, बल्कि यह लोगों के घरों और बाजारों की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। नगर निगम का मानना है कि तटीकरण से बाढ़ जैसी संभावित चुनौतियों से भी बचाव संभव हो सकेगा।
मेयर भट्ट ने यह भी बताया कि छोटी काशी में आने वाले धार्मिक पर्यटकों की संख्या हर साल बढ़ रही है। यदि शहर का सौंदर्यीकरण और विकास इस योजना के तहत होता है, तो न सिर्फ लोगों की संख्या बढ़ेगी बल्कि स्थानीय व्यापार को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से जल्द से जल्द मंडी को इस योजना में शामिल करने की मांग की है, ताकि शहर के कायाकल्प का रास्ता साफ हो सके।