Shimla, 23 November-:शिमला में आज सीटू के बैनर तले आईजीएमसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन और सुन्नी डैम हाइड्रो प्रोजेक्ट वर्कर्स ने केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित चार लेबर कोडों का विरोध करते हुए उनकी प्रतियां जलाईं। संगठनों ने इन कोडों को मजदूर विरोधी और पूंजीपति हितैषी करार देते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की।
यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर वेतन कोड 2019, औद्योगिक संबंध कोड 2020, सामाजिक सुरक्षा कोड 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थिति कोड 2020 लागू किए हैं। उनका आरोप है कि ये कोड मजदूरों के लोकतांत्रिक अधिकार, नौकरी की स्थिरता, वेतन सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को कमजोर करते हैं। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में ठेका और अस्थायी रोजगार को बढ़ावा मिलेगा तथा ट्रेड यूनियनों की गतिविधियाँ सीमित होंगी।वेतन कोड को लेकर यूनियन का कहना है कि न्यूनतम मजदूरी की बात करने के बावजूद इसकी परिभाषाओं में ऐसे अपवाद रखे गए हैं, जो बड़ी संख्या में असंगठित और घरेलू मजदूरों को दायरे से बाहर कर देते हैं। औद्योगिक संबंध कोड में हड़ताल के लिए अनिवार्य पूर्व सूचना और अन्य शर्तों को हड़ताल के संवैधानिक अधिकार पर प्रहार बताया गया। साथ ही 300 तक मजदूर रखने वाले प्रतिष्ठानों को बिना अनुमति छँटनी और बंद करने की छूट देने को ‘स्थायी रोजगार के अंत’ की दिशा में कदम बताया गया।
सामाजिक सुरक्षा कोड और व्यावसायिक सुरक्षा कोड पर भी संगठनों ने आपत्तियाँ जताईं। उनका कहना है कि असंगठित, गिग और प्रवासी मजदूरों के लिए सुरक्षा और लाभों की गारंटी अस्पष्ट है तथा निरीक्षण व्यवस्था को कमजोर कर दिया गया है, जिससे दुर्घटनाओं और असुरक्षित कार्यस्थितियों का खतरा बढ़ेगा।ट्रेड यूनियनों ने मांग की कि चारों कोडों को वापस लेकर पुराने श्रम कानूनों को बहाल किया जाए तथा श्रम सुधारों पर व्यापक परामर्श के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए।