Shimla, 23 November-:पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर शिक्षा व्यवस्था के राजनीतिकरण का आरोप लगाते हुए कहा है कि वर्तमान कांग्रेस सरकार शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाने के बजाय उसे पार्टी आधारित रंग देने में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद मात्र तीन वर्षों में करीब 2000 शिक्षण संस्थानों को बंद करने वाली सरकार अब शिक्षा के सुदृढ़ीकरण की बात कर रही है, जो अपने-आप में विरोधाभास है।
जयराम ठाकुर के अनुसार हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा बाल दिवस के अवसर पर जारी की गई 72 पृष्ठों की विशेष पुस्तिका इसका ताज़ा उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुस्तिका में 40 पेज केवल कांग्रेस नेताओं के शुभकामना संदेशों से भरे हुए हैं, जबकि शिक्षा मंत्री सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के संदेश तक शामिल नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सवाल खड़े करती है कि क्या प्रदेश के सरकारी संसाधनों का उपयोग कुछ राजनीतिक नेताओं को खुश करने के लिए किया जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी दावा किया कि पुस्तिका में साहित्यिक शुचिता का अभाव है। पंडित जवाहरलाल नेहरू पर आधारित बताई गई इस पुस्तिका में कई महान विचारकों के उद्धरण बिना श्रेय के दिए गए हैं। महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे राष्ट्रनायकों का उल्लेख तक नहीं है। साथ ही इस पुस्तिका के लेखक का नाम भी कहीं उल्लेखित नहीं किया गया है।उन्होंने यह भी कहा कि बोर्ड के शिक्षकों को मूल्यांकन का भुगतान पिछले दो वर्षों से लंबित है, जबकि परीक्षा ड्यूटी का भत्ता भी नहीं मिल पाया है। ऐसे में शिक्षा बोर्ड के संसाधनों का उपयोग छात्रों और शिक्षकों के हित में होना चाहिए, न कि राजनीतिक प्रचार के लिए।जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था के राजनीतिकरण का हर स्तर पर विरोध करेगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि यदि वास्तव में शिक्षा सुधार की इच्छा है तो केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति को प्रभावी रूप से लागू किया जाए और दो वर्षों से बंद पड़े कौशल विकास कार्यक्रमों को तुरंत पुनः शुरू किया जाए।उन्होंने कहा कि रोजगारोन्मुखी शिक्षा और कौशल विकास ही प्रदेश के युवाओं के भविष्य के लिए सबसे आवश्यक कदम हैं।