Dharamshala, Rahul-:हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) प्रमुख की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा लाए गए संशोधन विधेयक पर जोरदार हंगामा हुआ। प्रस्तावित कानून के विरोध में असंतुष्ट भारतीय जनता पार्टी विधायकों ने सदन से वॉक आउट किया।
विपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि सरकार द्वारा लाया गया भू-संपदा (विनियमन एवं विकास) हिमाचल प्रदेश संशोधन विधेयक 2025 न केवल “संविधान की धज्जियां उड़ाता है”, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों की भी अवहेलना करता है। उन्होंने कहा कि विधेयक का उद्देश्य रेरा चीफ की नियुक्ति में हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका समाप्त करना है, जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में यह स्पष्ट किया था कि संवैधानिक अथवा उच्च संस्थागत पदों की नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया में न्यायपालिका की भूमिका को कम करने का कोई भी प्रयास स्वीकार्य नहीं होगा। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय कानून में इस प्रकार का हस्तक्षेप न तो वैधानिक है और न ही संवैधानिक। “राज्य सरकार को केंद्रीय कानून में इस तरह का बदलाव करने का अधिकार ही नहीं है।उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस पर सरकार से प्रश्न किया गया तो मुख्यमंत्री ने हमेशा की तरह विपक्ष पर “न पढ़कर आने” की टिप्पणी कर मुद्दे को टालने की कोशिश की।जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश पिछले तीन वर्षों से सरकार की “असमझ जिम्मेदारी” का खामियाजा भुगत रहा है।विपक्ष ने सरकार से मांग की कि वह संविधानसम्मत प्रक्रिया का पालन करे और न्यायपालिका की भागीदारी सुनिश्चित करने वाले मौजूदा तंत्र में एकतरफा बदलाव करने से बाज आए।