Shimla, 3 December-:सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश ने प्रदेश सरकार के उस प्रस्ताव पर गंभीर आपत्ति दर्ज की है, जिसके तहत निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के लिए ओवरटाइम कार्य की अधिकतम सीमा को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया जा रहा है। सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसके अनुसार अब कर्मचारी एक तिमाही में 144 घंटे तक ओवरटाइम कर सकेंगे। इस संदर्भ में उद्योग, श्रम एवं रोजगार मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने विधानसभा में संशोधन विधेयक रखा है।
सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम ने कहा कि अधिनियम की धारा 7(2)(अ) में तय मौजूदा 50 घंटे की ओवरटाइम सीमा को तीन गुना से अधिक बढ़ाना मजदूरों के शोषण को वैध करने जैसा कदम है। हालांकि नियम के अनुसार धारा 7(2)(ब) के तहत ओवरटाइम का भुगतान सामान्य वेतन के दोगुने दर पर किया जाना चाहिए, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे काफी अलग है। राज्य के अधिकांश व्यापारिक प्रतिष्ठानों में यूनियन या संगठनों के अभाव में मजदूरों को आठ घंटे से अधिक काम करने पर भी पूरा वेतन नहीं मिल पाता है।सीटू नेताओं ने उदाहरण देते हुए कहा कि नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत 108 और 102 एंबुलेंस कर्मी 12-12 घंटे काम करने के बावजूद 8 घंटे का ही वेतन पाते हैं। निजी बस सेवाओं के चालक और परिचालक अक्सर 14 घंटे तक ड्यूटी करते हैं, फिर भी उन्हें अतिरिक्त समय का उचित भुगतान नहीं मिलता। ऐसे में ओवरटाइम की सीमा बढ़ाने से मजदूरों पर कार्य का बोझ और शोषण दोनों बढ़ेंगे।
सीटू का कहना है कि यह कदम केंद्र सरकार द्वारा नवंबर 2020 में लाए गए श्रम कानूनों (लेबर कोड) का ही विस्तार है, जिनका विभिन्न श्रमिक संगठनों ने विरोध किया था। संगठन ने स्पष्ट किया है कि 7 दिसंबर को मंडी में होने वाली राज्य कमेटी बैठक में इस प्रस्ताव और लेबर कोड के खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।