सिरसा। हरियाणा में खाद्य सुरक्षा की स्थिति को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। प्रदेश के 22 जिलों से लिए गए 17,350 खाद्य सैंपलों में से 529 नमूने मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक पाए गए हैं। इस खुलासे के बाद सांसद कुमारी सैलजा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सांसद सैलजा ने कहा कि रिपोर्ट यह साफ दर्शाती है कि प्रदेश में मिलावटखोरी खुलेआम फल-फूल रही है, जबकि इसे रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। उन्होंने चिंता जताई कि दूध, घी, पनीर, मावा और मिठाइयों जैसी रोजमर्रा की खाद्य वस्तुएं मिलावट के कारण आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन चुकी हैं।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पिछले पांच वर्षों में खाद्य मिलावट जैसे गंभीर अपराध पर कोई प्रभावी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। सांसद ने कहा कि यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही और कमजोर निगरानी तंत्र को उजागर करती है।
कुमारी सैलजा ने यह भी कहा कि हरियाणा पहले से ही कई पर्यावरणीय समस्याओं से जूझ रहा है। नदियों में बढ़ता प्रदूषण, जहरीली हवा और अब मिलावटी खाद्य पदार्थ—ये सभी मिलकर आमजन के स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहे हैं।
इसी दौरान सांसद सैलजा ने सिरसा के डबवाली रोड स्थित खैरेकां गांव से जुड़ी एक राहत भरी जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि क्षेत्र को दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट घोषित किया गया था, जहां लगातार सड़क हादसे हो रहे थे। इस मुद्दे को संसद में उठाने के बाद केंद्र सरकार ने यहां छह लेन के व्हीकल अंडरपास (VUB) के निर्माण को मंजूरी दी है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में लिखित जवाब के माध्यम से इस परियोजना की पुष्टि की है। अंडरब्रिज बनने से यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, सड़क हादसों में कमी आएगी और स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
सांसद सैलजा ने सरकार से मांग की कि खाद्य सुरक्षा कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए और मिलावटखोरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आम नागरिकों के स्वास्थ्य से कोई समझौता न हो।