रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) परिसर बुधवार को उस समय विरोध के नारों से गूंज उठा, जब कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारी संगठनों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और “कर्मचारी एकता जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए।
बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद विश्वविद्यालय में लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर है। इस मुद्दे पर शिक्षक और कर्मचारी दो गुटों में बंट गए हैं। एक पक्ष बैठक के समर्थन में था, जबकि दूसरा पक्ष इसके विरोध में उतर आया।
समर्थक गुट का कहना है कि विश्वविद्यालय के करीब 100 शिक्षकों की पदोन्नति कई वर्षों से अटकी हुई है। यदि कार्यकारी परिषद की बैठक नहीं होती, तो पदोन्नति की प्रक्रिया ठप पड़ सकती है। इसी कारण बैठक को समय पर कराना जरूरी था।
वहीं, विरोध करने वाले पक्ष ने बैठक की प्रक्रिया और कुछ अन्य प्रशासनिक मुद्दों को लेकर असहमति जताई। इसके चलते परिसर में नारेबाजी तेज हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
इस बीच कुलपति की अध्यक्षता में ईसी बैठक शुरू की गई। विरोध प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के कुछ छात्र संगठन भी शामिल हो गए, जिन्होंने बैठक के खिलाफ आवाज बुलंद की। हालांकि भारी हंगामे के बावजूद बैठक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चलती रही।
उधर, एमडीयू में कुलपति और रजिस्ट्रार के बीच चल रहे विवाद ने भी नया मोड़ ले लिया। जानकारी के अनुसार बुधवार को कुलपति ने रजिस्ट्रार डॉ. कृष्णा कांत को निलंबित कर दिया था, लेकिन हरियाणा के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए निलंबन आदेश पर रोक लगा दी और रजिस्ट्रार को बहाल करने के निर्देश जारी किए।
राज्यपाल के आदेश में कहा गया है कि डॉ. कृष्णा कांत को उनकी मूल जिम्मेदारियां सौंपी जाएं और निलंबन आदेश को प्रभावी न माना जाए। इसके साथ ही राज्यपाल ने कार्यकारी परिषद की बैठक पर भी रोक लगाते हुए इसे अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। फिलहाल एमडीयू में पदोन्नति और प्रशासनिक फैसलों को लेकर विवाद और तनाव का माहौल बना हुआ है।