शिमला, 20 फरवरी -: प्रदेश सरकार ने वंचित वर्गों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाए रखते हुए इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना में महत्वपूर्ण विस्तार किया है। इसके तहत अब विधवा महिलाओं की बेटियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में वित्तीय सहायता दी जाएगी, चाहे वे प्रदेश के भीतर अध्ययन कर रही हों या बाहर।इस योजना का उद्देश्य विधवा, निराश्रित या तलाकशुदा महिलाओं तथा दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में समग्र सहायता प्रदान करना है। योजना के संशोधन के तहत अब 27 वर्ष तक की छात्राएं इस योजना का लाभ ले सकेंगी।
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, यदि छात्रा राज्य से बाहर स्थित सरकारी संस्थानों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम कर रही है और सरकारी छात्रावास की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उसे किराया या पीजी आवास शुल्क के लिए प्रति माह 3,000 रुपये तक 10 महीनों तक सहायता दी जाएगी।योजना के अंतर्गत इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, व्यवसाय एवं प्रबंधन, चिकित्सा, लॉ, कंप्यूटर एप्लीकेशन एवं आईटी, शिक्षा और मानविकी, शिल्पकार प्रशिक्षण एवं केंद्रीय पेट्रोकेमिकल संस्थान के पाठ्यक्रम शामिल हैं।वर्तमान में 18 वर्ष तक की छात्राओं को मासिक वित्तीय सहायता दी जा रही है। योजना का विस्तार होने से 18 से 27 वर्ष की आयु वर्ग की 504 छात्राओं को अतिरिक्त लाभ मिलेगा। अनुमान है कि इनमें से लगभग 20% छात्राएं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का चयन कर सकती हैं, जिसके लिए 1 करोड़ रुपये अतिरिक्त वार्षिक बजट रखा जाएगा।
वित्त वर्ष 2025-26 में योजना के लिए कुल 31.01 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें 22.96 करोड़ रुपये पहले ही व्यय हो चुके हैं।मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि यह योजना लाभार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने और शिक्षा की समान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम है। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के उत्थान में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।