Summer Express, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पशुओं की हिरासत से जुड़े नियमों की वैधता पर सवाल उठाने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई और सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया।
याचिका में पशु क्रूरता निवारण नियम, 2017 के नियम 3 को पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 29 के खिलाफ असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। अधिनियम की यह धारा दोषी पाए गए व्यक्ति को पशुओं के स्वामित्व से वंचित करने के न्यायालयीय अधिकार से संबंधित है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि नियम 3 के तहत दोषसिद्धि के बाद पशुधन की जब्ती, हस्तांतरण या स्थायी रूप से स्वामित्व से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 300ए का उल्लंघन करता है। अनुच्छेद 14 समानता के अधिकार और अनुच्छेद 300ए विधि के बिना किसी व्यक्ति को संपत्ति से वंचित न किए जाने की गारंटी देता है।
सुप्रीम कोर्ट की इस कार्रवाई से पशु संरक्षण और कानूनी प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखने के प्रयासों पर केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों की स्थिति स्पष्ट होगी।