Summer Express , शिमला | हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। प्रतिकूल आर्थिक हालात और बढ़ते कर्ज के दबाव के बीच यह बजट विशेष रूप से राज्य को आत्मनिर्भर बनाने और वर्ष 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में रोडमैप पेश करता है।
सीएम सुक्खू ने बजट भाषण शुरू किया। उन्होंने कहा कि बजट इस समय पेश किया जा रहा है जब राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) 1 अप्रैल से बंद होने जा रहा है। उन्होंने बजट तैयार करने में योगदान देने वाली टीम को बधाई दी और बताया कि आठ से दस दिन तक रात-दिन मेहनत कर इस बजट को तैयार किया गया।
बजट से विधायक, कर्मचारी, पेंशनर, श्रमिक और आम जनता को बड़ी उम्मीदें हैं। सरकार ने विकास के सात प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यटन, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण और डाटा स्टोरेज शामिल हैं। बजट में इन क्षेत्रों के लिए ठोस घोषणाओं की संभावना है।
हिमाचल प्रदेश पर वर्तमान में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण है। हर माह वेतन, पेंशन और अन्य देनदारियों के लिए करीब 2,800 करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है। ऐसे में सरकार को विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन साधना होगा।
गत वर्ष 2025-26 का बजट 58,514 करोड़ रुपये का था। मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए इस वर्ष का बजट इसी के आसपास रहने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार देर रात तक अधिकारियों के साथ बजट मसौदे पर चर्चा कर भाषण को अंतिम रूप दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बजट में वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए ठोस कदम उठाने की कोशिश की गई है, जो हिमाचल प्रदेश को सतत और समृद्ध राज्य बनाने में मदद करेंगे।