Summer Express, पंचकूला | हरियाणा में 18 सरकारी विभागों से जुड़े 590 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच लगातार तेज हो रही है। मामले के मुख्य सूत्रधार विक्रम वाधवा द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे कई बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। इन खातों के जरिए कथित रूप से फ्रॉड की राशि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश की गई थी। खातों के फ्रीज होने के बाद इन परियोजनाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं, और कई प्रोजेक्ट्स पर ताले लगने की आशंका जताई जा रही है।
ईडी और ईओडब्ल्यू की जांच में पता चला है कि वाधवा ने हेराफेरी से प्राप्त धनराशि को कई रियल एस्टेट फर्मों और शेल कंपनियों के माध्यम से ट्रांसफर किया। जांच टीम ने संबंधित कंपनियों के ठिकानों पर छापेमारी कर निवेश से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। इसके अलावा, चंडीगढ़ स्थित मेगा स्टोर और उसके पार्टनर मोहित गोयल के ठिकानों से भी अहम साक्ष्य मिले। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कुछ कंपनियों ने सीधे सरकारी खातों से राशि प्राप्त कर उसे आगे अन्य शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया।
मुख्य आरोपी वाधवा को सात दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। ईओडब्ल्यू ने बताया कि वाधवा पहले क्रेस्ट के 116.84 करोड़ रुपये गबन मामले में और बाद में क्रेस्ट में 75 करोड़ रुपये के ठगी के केस में पुलिस रिमांड पर रह चुका है। अब पुलिस अन्य तीन आरोपितों रिभव ऋषि, सीमा धीमान और अभय कुमार को वाधवा के सामने पूछताछ के लिए पेश करेगी।
जांच में यह खुलासा भी हुआ कि सैक्टर-32 स्थित आइडीएफसी फर्स्ट बैंक में क्रेस्ट के खाते में कुल 272 अनधिकृत जमा-निकासी हुई, जिनमें से 31 लेनदेन पूरी तरह संदिग्ध हैं। ये ट्रांजैक्शन न तो बैंक शाखा द्वारा किए गए और न ही अधिकृत अधिकारियों ने मंजूरी दी थी। इसके अलावा, विभाग को भेजे गए कुछ बैंक स्टेटमेंट भी फर्जी और छेड़छाड़ किए हुए पाए गए।
जांच एजेंसियां अब इस घोटाले के और बड़े खुलासे करने की तैयारी में हैं, और प्रोजेक्ट्स पर वित्तीय संकट के असर पर भी नजर रखी जा रही है।