Summer Express, चंडीगढ़ | चंडीगढ़ में हरियाणा की अक्षय ऊर्जा और सौर तकनीक को बढ़ावा देने वाली एजेंसी ‘क्रेस्ट’ (CREST) में करीब 83 करोड़ रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है। इस अनियमितता के उजागर होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है और मामले में एक भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
प्राथमिक जांच और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकारी खजाने से सौर ऊर्जा परियोजनाओं और संबंधित उपकरणों की खरीद के लिए जारी किए गए 83 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा नियमों की अनदेखी करते हुए खर्च किया गया। आरोप है कि कई मामलों में बिना वास्तविक कार्य किए या फर्जी बिलों के आधार पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
जांच के दौरान सामने आए संकेतों के मुताबिक, सौर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में व्यापक स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। एक वरिष्ठ IFS अधिकारी की भूमिका पर विशेष रूप से संदेह जताया जा रहा है, जिसके चलते वह जांच एजेंसियों की निगरानी में हैं। संभावना जताई जा रही है कि मामले की जांच जल्द ही सतर्कता विभाग (विजिलेंस) को सौंपी जा सकती है या विभाग स्तर पर विस्तृत जांच शुरू की जाएगी।
CREST राज्य में सौर ऊर्जा के जरिए पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने का काम करती है, ऐसे में इस स्तर की वित्तीय गड़बड़ी सामने आने से सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता। इसमें निचले स्तर के कर्मचारियों और बाहरी वेंडरों की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है। फिलहाल, संबंधित विभाग मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की गहन जांच में जुटा हुआ है और जल्द ही विस्तृत खुलासे होने की संभावना है।