Summer Express, नई दिल्ली | रिकॉर्ड ऊंचे दामों के बावजूद भारत में सोने और चांदी की मांग में तेजी बनी हुई है, जिसका सीधा असर आयात के आंकड़ों पर देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 11 महीनों में गोल्ड और सिल्वर इंपोर्ट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे देश के व्यापार घाटे पर भी दबाव बढ़ा है।
वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से फरवरी 2025-26 के बीच भारत का सोना आयात करीब 28.73% बढ़कर 69 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 53.52 अरब डॉलर था। इसी दौरान आयात में बढ़ोतरी के चलते देश का व्यापार घाटा बढ़कर 310.60 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 261.80 अरब डॉलर था।
वहीं, चांदी के आयात में भी तेज उछाल देखने को मिला है। इस अवधि में सिल्वर इंपोर्ट 143% बढ़कर 11.43 अरब डॉलर तक पहुंच गया। चांदी का उपयोग न केवल आभूषणों में बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और फार्मा जैसे उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर होता है, जिससे इसकी मांग लगातार बनी रहती है।
भारत में सोने की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। राष्ट्रीय राजधानी में सोना करीब 1,51,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है, बावजूद इसके निवेश और ज्वेलरी दोनों सेगमेंट में मांग कमजोर नहीं पड़ी है।
आयात के स्रोतों की बात करें तो भारत के कुल गोल्ड इंपोर्ट में स्विट्जरलैंड की हिस्सेदारी लगभग 40% है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (16% से अधिक) और दक्षिण अफ्रीका (लगभग 10%) प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों में शामिल हैं।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर है, जहां आयात का बड़ा हिस्सा घरेलू ज्वेलरी इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है। सरकार ने हाल ही में सोने, चांदी और प्लैटिनम से बने उत्पादों के आयात पर नियंत्रण के लिए कुछ प्रतिबंध भी लागू किए हैं।
इस बीच, बढ़ते व्यापार घाटे का असर चालू खाता घाटे (CAD) पर भी दिखाई दे रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मुताबिक, दिसंबर तिमाही में CAD बढ़कर 13.2 अरब डॉलर (GDP का 1.3%) हो गया। हालांकि अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान यह घटकर 30.1 अरब डॉलर (GDP का 1%) रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 36.6 अरब डॉलर था।