Summer Express, नई दिल्ली | देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank को हाल के दिनों में निवेशकों के भरोसे में कमी और भारी बिकवाली का सामना करना पड़ रहा है। चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के बाद बैंक को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर शेयर बाजार में साफ दिखाई दे रहा है।
मार्च 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बैंक से करीब 35,000 करोड़ रुपये की निकासी की। इस भारी बिकवाली के चलते बैंक के शेयरों पर लगातार दबाव बना हुआ है और निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर हुआ है।
जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में HDFC Bank के शेयरों में 26.2% तक की गिरावट दर्ज की गई, जो मार्च 2020 के बाद सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। उस दौरान कोविड-19 संकट के समय भी स्टॉक में लगभग 33% की गिरावट आई थी।
मार्च तिमाही में विदेशी निवेशकों ने करीब 47.95 करोड़ शेयर बेच दिए। इसके साथ ही बैंक में विदेशी निवेशकों की संख्या भी घटकर 2,528 रह गई, जो दिसंबर 2025 के अंत में 2,757 थी। यह लगातार तीसरी तिमाही है जब विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी में गिरावट देखी गई है। वर्तमान में उनकी हिस्सेदारी घटकर 44.05% रह गई है, जबकि पिछली तिमाही में यह 47.67% थी।
हालांकि, घरेलू निवेशकों ने बैंक पर भरोसा बनाए रखा है। म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 26.66% से बढ़कर 29.54% हो गई है। इस दौरान उन्होंने लगभग 28,293 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। इसके अलावा प्रोविडेंट फंड, इंश्योरेंस कंपनियों और एलआईसी ने भी बैंक में निवेश बढ़ाया है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, स्टॉक में गिरावट के पीछे कई कारण हैं, जिनमें चेयरमैन का अचानक इस्तीफा, मैनेजमेंट को लेकर अनिश्चितता, Securities and Exchange Board of India द्वारा इस्तीफे की समीक्षा, तथा AT-1 बॉन्ड से जुड़े विवाद और आंतरिक कार्रवाई शामिल हैं।
इन सभी कारकों के चलते फिलहाल HDFC Bank के शेयर दबाव में बने हुए हैं और निवेशकों की नजर आगे के मैनेजमेंट और नियामकीय अपडेट्स पर टिकी हुई है।