Summer express, पेरिस | होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच फ्रांस ने अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करते हुए शक्तिशाली नौसैनिक बेड़े को लाल सागर की ओर रवाना कर दिया है। फ्रांस का परमाणु ऊर्जा से संचालित विमानवाहक पोत ‘चार्ल्स डी गॉल’ अब दक्षिणी लाल सागर की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ एक इतालवी और एक डच युद्धपोत भी तैनात किए गए हैं। माना जा रहा है कि यह कदम होर्मुज क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फ्रांस और ब्रिटेन की संयुक्त रणनीति का हिस्सा है।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मार्च में इस सैन्य तैनाती की घोषणा की थी। खास बात यह है कि यह फैसला ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव बढ़ाने और समुद्री गतिविधियों को प्रभावित करने के बाद लिया गया। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक स्तर पर करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई होती है।
फ्रांसीसी सेना के प्रवक्ता कर्नल गुइलौम वर्नेट ने कहा कि स्वेज नहर पार कर लाल सागर में पहुंचने के बाद फ्रांसीसी नौसेना अब होर्मुज क्षेत्र के काफी करीब आ गई है। इससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देना आसान होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह मिशन रक्षात्मक स्वरूप का है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत संचालित किया जा रहा है।
फ्रांस ने यह भी साफ किया है कि उसका अभियान अमेरिका के हालिया “प्रोजेक्ट फ्रीडम” से अलग है। अमेरिका ने होर्मुज क्षेत्र में अपने एस्कॉर्ट मिशन की शुरुआत की थी, जिसका ईरान ने कड़ा विरोध किया था। वहीं फ्रांस और ब्रिटेन बहुराष्ट्रीय सहयोग के तहत समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, फ्रांस और ब्रिटेन इस अभियान में 50 से अधिक देशों के साथ समन्वय कर रहे हैं। अप्रैल में पेरिस में एक उच्चस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया था, जबकि ब्रिटेन में सैन्य रणनीतिकारों की बैठक के दौरान अभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया।
फ्रांसीसी नौसेना ने इस मिशन के तहत ‘चार्ल्स डी गॉल’ के अलावा आठ फ्रिगेट और दो मिस्ट्रल श्रेणी के उभयचर युद्धपोत भी तैनात किए हैं। विमानवाहक पोत पर तैनात राफेल लड़ाकू विमान लंबी दूरी तक सटीक सैन्य कार्रवाई करने में सक्षम हैं।
इस बीच अमेरिका पहले ही ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर चुका है। ऐसे में फ्रांस और ब्रिटेन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब होर्मुज क्षेत्र में आने वाले घटनाक्रम पर टिकी हुई है।