Summer express, कांगड़ा। पंचायती राज चुनावों के दौरान पोलिंग पार्टियों के लिए भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और हेल्परों को सौंपे जाने के प्रशासनिक आदेश का विरोध तेज हो गया है। इस फैसले के खिलाफ आंगनबाड़ी वर्कर-हेल्पर यूनियन (सीटू संबद्ध) ने देहरा में प्रदर्शन कर सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी महिला कर्मियों ने आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग उठाई।
देहरा में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर एसडीएम कार्यालय के बाहर एकत्रित हुईं। प्रदर्शन के बाद यूनियन प्रतिनिधियों ने एसडीएम कुलवंत सिंह पोटन को ज्ञापन सौंपा। यूनियन की जसवां-परागपुर अध्यक्ष संजना ठाकुर ने कहा कि आंगनबाड़ी कर्मियों पर पहले से ही विभागीय कार्यों का अत्यधिक दबाव है। ऐसे में उन पर जबरन खाना बनाने और परोसने जैसी अतिरिक्त जिम्मेदारियां थोपना पूरी तरह अनुचित है।
यूनियन नेताओं का कहना है कि चुनावी स्टाफ मतदान से एक दिन पहले ही पोलिंग बूथों पर पहुंच जाता है और अधिकांश पोलिंग पार्टियों में पुरुष कर्मचारी शामिल होते हैं। ऐसे में महिला आंगनबाड़ी कर्मियों को देर रात तक बूथों पर रुककर भोजन व्यवस्था संभालनी पड़ेगी, जिससे उनकी सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। खासकर दूरदराज और सुनसान क्षेत्रों में रात के समय उनकी सुरक्षित घर वापसी बड़ी चिंता का विषय है।
पालमपुर में सीटू के जिला प्रधान केवल कुमार, जिला सचिव रविंद्र कुमार और जिला वित्त सचिव अशोक कटोच ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की। सीटू नेताओं ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन और रिटर्निंग अधिकारियों ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों की अनदेखी की है। इन निर्देशों में साफ कहा गया है कि आंगनबाड़ी कर्मियों से उनके नियमित कार्यों के अलावा चुनाव या सर्वेक्षण जैसे अतिरिक्त कार्य नहीं करवाए जा सकते।
यूनियन नेताओं ने बताया कि इस महिला विरोधी फैसले के खिलाफ प्रदेशभर के जिलाधीशों को ज्ञापन सौंपे गए थे। उनका कहना है कि शिमला में आदेश वापस ले लिया गया, लेकिन अन्य जिलों में अब तक इसे लागू रखा गया है। यूनियन ने मांग की है कि शिमला की तर्ज पर सभी जिलों में आंगनबाड़ी कर्मियों की चुनाव ड्यूटी रद्द कर भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी पंचायत सचिवों को सौंपी जाए।