Summer express/शिमला -: हिमाचल प्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में कार्यरत पूर्व सैनिकों को सम्मान और प्रोत्साहन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उन्हें मानद पदोन्नति का लाभ प्रदान किया है। इस निर्णय के तहत 246 पूर्व सैनिकों को मानद हेड कांस्टेबल तथा 115 पूर्व सैनिकों को मानद सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) के पद पर नियुक्ति दी जाएगी। इस पहल से कुल 361 पूर्व सैनिक पुलिसकर्मियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह के सम्मान में ओक ओवर, शिमला में आयोजित एक समारोह में पूर्व सैनिकों ने राज्य सरकार के इस फैसले के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने हेड कांस्टेबल सुधीर शर्मा और कांस्टेबल रवि दत्त के पाइपिंग समारोह में भी भाग लिया तथा उन्हें नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं दीं।समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस बल में कार्यरत पूर्व सैनिक अपने साथ अनुशासन, अनुभव और समर्पण की ऐसी कार्यशैली लेकर आते हैं, जो कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उनके योगदान को उचित सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान नियमों के अनुसार किसी पुलिस कर्मचारी को मानद हेड कांस्टेबल बनने के लिए 20 वर्ष तथा मानद एएसआई बनने के लिए 32 वर्ष की सेवा पूरी करनी होती है। चूंकि अधिकांश पूर्व सैनिक सेना से सेवानिवृत्ति के बाद पुलिस सेवा में शामिल होते हैं, इसलिए उनके लिए निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर पाना कठिन हो जाता है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पात्रता अवधि में आवश्यक छूट देने का निर्णय लिया है।उन्होंने कहा कि यह फैसला न केवल पूर्व सैनिकों के मनोबल को बढ़ाएगा, बल्कि राष्ट्र और प्रदेश के प्रति उनकी सेवाओं को सम्मानित करने का भी माध्यम बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने पहले देश की सीमाओं की रक्षा की और अब समाज में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस विभाग में सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें उचित पहचान मिलनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने युवाओं और सेना भर्ती से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अग्निवीर योजना लागू होने के बाद युवाओं के सेना के प्रति आकर्षण में कुछ कमी देखने को मिली है। इसके बावजूद राज्य सरकार अग्निवीरों के लिए अधिक से अधिक रोजगार अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है ताकि उनकी ऊर्जा और कौशल का बेहतर उपयोग हो सके।उन्होंने पुलिस सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 218 के अंतर्गत पहले कानूनी संरक्षण केवल वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को उपलब्ध था, लेकिन अब यह सुरक्षा कठिन परिस्थितियों में कार्य करने वाले पुलिस कर्मियों तक भी विस्तारित कर दी गई है। इसके अलावा पुलिस बल के आधुनिकीकरण और प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने राज्य में नशे, विशेषकर चिट्टा तस्करी, के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को भी सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि नशा तस्करों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी है और ऐसे मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भी कठोर कदम उठाए जा रहे हैं।इस अवसर पर धनी राम शांडिल , अशोक तिवारी तथा हिमाचल प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों ने सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे उनके सम्मान और योगदान की महत्वपूर्ण पहचान बताया।