Summer express/शिमला, संजू -:शिमला में वकीलों द्वारा किए गए चक्का जाम को लेकर मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन के कारण शहर में कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा। उनका कहना था कि किसी भी मुद्दे का समाधान कानून व्यवस्था को प्रभावित किए बिना संवाद के माध्यम से निकाला जा सकता है।
नरेश चौहान ने बताया कि छोटा शिमला से शिल्ली चौक तक का मार्ग सील्ड रोड के दायरे में आता है और इसे पूरी तरह ट्रैफिक के लिए खोलना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर परमिट की मांग लगातार बढ़ रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विधानसभा में विधेयक पारित कर 1,000 रुपये प्रतिमाह परमिट शुल्क निर्धारित किया था। साथ ही कुछ रूट्स के दुरुपयोग की शिकायतें भी प्रशासन के पास पहुंच रही थीं।उन्होंने कहा कि वकीलों को अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर सरकार के साथ बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए था। चुनी हुई प्रतिनिधि संस्था मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रख सकती थी। चौहान ने जानकारी दी कि हालिया वार्ता के बाद एक समिति गठित करने पर सहमति बनी है। यह समिति पात्र लोगों की सूची तैयार करेगी और यह तय करेगी कि किन लोगों को रियायती पास की सुविधा दी जा सकती है।वकीलों के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए नरेश चौहान ने कहा कि कानून की जानकारी रखने वाले लोगों से ऐसी कार्रवाई की अपेक्षा नहीं थी। उन्होंने पूछा कि आम लोगों के वाहनों को रोककर चालान करवाने का अधिकार प्रदर्शनकारियों को किसने दिया। उनका कहना था कि किसी भी परिस्थिति में कानून को अपने हाथ में लेना उचित नहीं है।वहीं, नेता प्रतिपक्ष की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए चौहान ने कहा कि वकीलों की आवाज दबाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है और इस मुद्दे पर अनावश्यक राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए।