Summer express, नई दिल्ली। महाराष्ट्र के अकोला सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसी) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक आदिवासी महिला अपने बीमार पति को पीठ पर उठाकर अस्पताल के विभिन्न विभागों में ले जाती नजर आ रही है। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल में मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
वायरल वीडियो में महिला अपने छोटे बच्चे के साथ अस्पताल परिसर में दिखाई दे रही है। आरोप है कि स्ट्रेचर या व्हीलचेयर उपलब्ध न होने के कारण उसे अपने पति को खुद ही एक विभाग से दूसरे विभाग तक ले जाना पड़ा। घटना ने अस्पताल प्रशासन की व्यवस्थाओं को लेकर बहस छेड़ दी है।
हालांकि, जीएमसी के डीन डॉ. संजय सोनोने ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वीडियो को अस्पताल की छवि खराब करने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया जा रहा है। उनके अनुसार महिला अस्पताल की प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित नहीं थी और उसने सहायता के लिए अस्पताल कर्मियों या रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) से संपर्क नहीं किया था।
डॉ. सोनोने ने बताया कि महिला ओपीडी समय समाप्त होने के बाद अस्पताल पहुंची थी और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी किए बिना सीधे मरीज को अंदर ले गई। उन्होंने कहा कि उपचार शुरू करने से पहले निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी होता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई और मरीज को आवश्यक सहायता समय पर उपलब्ध कराई गई थी या नहीं।
गौरतलब है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की उपलब्धता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। कई मामलों में मरीजों के परिजनों को खुद ही उन्हें अस्पताल के विभिन्न विभागों तक ले जाते देखा गया है। ऐसे में ताजा घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर चर्चा तेज कर दी है।