समर न्यूज | चंडीगढ़
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने लंबित महंगाई भत्ते (डीए) के भुगतान के मामले में पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी चुनौती पर जल्द सुनवाई कराने को कहा है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को अपने फैसले के खिलाफ अपील करने का पूरा अधिकार है, लेकिन केवल विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर कर उसके दोष दूर किए बिना हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने सरकार से अगले सप्ताह तक अपनी अपील पर सुनवाई कराने की दिशा में कदम उठाने को कहा।
सरकार की ओर से बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट में दायर चुनौती में कुछ आपत्तियां हैं और उन्हें दूर करने की प्रक्रिया चल रही है। इस पर पीठ ने कहा कि अपील का अधिकार सवालों के घेरे में नहीं है, लेकिन इसका इस्तेमाल हाई कोर्ट के आदेश को लंबित रखने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने सरकार से अपनी एसएलपी की आपत्तियां दूर कर उसे जल्द सूचीबद्ध कराने को कहा।
अनुपालन की स्थिति पर हलफनामे की मांग
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन मित्तल ने कहा कि सरकार को अनुपालन संबंधी स्थिति हलफनामे के माध्यम से अदालत के सामने रखनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केवल सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला देकर हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन से बचा नहीं जा सकता। पीठ ने मामले की सुनवाई एक सप्ताह के लिए टाल दी और सरकार को तब तक अपनी अपील पर आगे की कार्रवाई करने को कहा।
यह है मामला
विवाद की शुरुआत उस फैसले से हुई, जिसमें हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सरकार को अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को केंद्र सरकार के पैटर्न के अनुरूप महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की लंबित किस्तें जारी करने का निर्देश दिया था। अदालत ने पंजाब में कार्यरत अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को दिए जा रहे डीए की दर को आधार बनाने की बात कही थी। इस आदेश को चुनौती दी गई थी।
खारिज हुई अपील
तीन अगस्त को खंडपीठ ने सरकार व राज्य विद्युत निगम लिमिटेड की अपील खारिज करते हुए मूल निर्देशों को बरकरार रखा। चूंकि पहले निर्धारित 30 जून की समयसीमा अपील की सुनवाई के दौरान समाप्त हो चुकी थी। नई समयसीमा तय करते हुए लंबित डीए-डीआर की सभी किस्तें 15 दिन के भीतर जारी करने का निर्देश दिया। देरी होने पर बकाया राशि पर छह प्रतिशत सालाना ब्याज देने का भी निर्देश था।
अवमानना याचिका
अदालत के आदेश के बाद कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की ओर से अनुपालन न होने का आरोप लगाते हुए अवमानना कार्यवाही की मांग की गई। सरकार ने अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा था। इससे पहले अदालत ने मुख्य सचिव को आदेश के अनुपालन की जानकारी हलफनामे में देने को कहा था। इस विवाद का अभी कोई सर्वमान्य हल नही िनकल पाया है।
सरकार के सामने चुनौती
सरकार ने तर्क दिया था कि लंबित डीए का भुगतान राज्य पर बहुत बड़ा वित्तीय बोझ डालेगा। अदालत ने कहा है कि वित्तीय कठिनाई को कर्मचारियों को पहले से स्वीकार किए गए लाभ से वंचित करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। अब हाई कोर्ट की ताजा टिप्पणी के बाद सरकार को एक ओर सुप्रीम कोर्ट में अपनी चुनौती आगे बढ़ानी होगी और दूसरी ओर हाई कोर्ट के निर्देशों पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा।