शिमला | स्ट्रोक अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही, बल्कि युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। एआईएमएस चमियाना के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर ने बताया कि हर दो मिनट में एक व्यक्ति स्ट्रोक से अपनी जान गंवा रहा है, जबकि हर छह में से एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में कभी न कभी स्ट्रोक का शिकार होता है।
डॉ. सुधीर ने कहा कि स्ट्रोक के 15 से 20 प्रतिशत मामले अब 40 वर्ष से कम आयु के लोगों में देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि बीपी, मोटापा, शुगर और धूम्रपान इसके प्रमुख कारण हैं।
यदि ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहे तो स्ट्रोक का खतरा 40 फीसदी तक घटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नियमित स्वास्थ्य जांच, ब्लड प्रेशर और शुगर पर नियंत्रण, धूम्रपान व शराब से दूरी, नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाने से स्ट्रोक के खतरे को 40 से 80 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।
डॉ. सुधीर के अनुसार, स्ट्रोक दो प्रकार के होते हैं —
- ब्लॉकेज स्ट्रोक: मस्तिष्क की नस ब्लॉक हो जाती है, जो 80-85% मामलों में पाया जाता है।
- ब्लीडिंग स्ट्रोक: मस्तिष्क की नस फट जाती है, जो 15-20% मामलों में होता है और अधिक घातक साबित होता है।
उन्होंने बताया कि शुरुआती तीन घंटे के भीतर इलाज शुरू किया जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। डॉ. सुधीर ने कहा, “एक बार स्ट्रोक होने के बाद व्यक्ति में दोबारा स्ट्रोक का खतरा दोगुना हो जाता है, इसलिए समय पर पहचान और सावधानी बेहद जरूरी है।”
अंत में उन्होंने अपील की कि लोग स्ट्रोक के लक्षणों, रोकथाम और इलाज को लेकर जागरूकता फैलाएं, ताकि समय रहते इलाज से अनगिनत जिंदगियां बचाई जा सकें।