चंडीगढ़ | हरियाणा BJP नेता कुलदीप बिश्नोई इन दिनों राजस्थान दौरे पर हैं, जहां उनके साथ विधायक रणधीर पनिहार भी पहुंचे। अपहरण के आरोप लगने के बाद यह पहली बार है जब रणधीर पनिहार सार्वजनिक रूप से किसी कार्यक्रम में नजर आए हैं। दोनों नेताओं का जोधपुर एयरपोर्ट पर समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। वहीं, बिश्नोई समाज के बुजुर्गों ने कुलदीप बिश्नोई को पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मानित भी किया।
कुलदीप बिश्नोई विवाह सहित कई सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने राजस्थान पहुंचे हैं। इसी दौरान बिश्नोई महासभा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र बूड़िया ने अचानक सक्रिय होते हुए महासभा के चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया, जिससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया।
चौधर की लड़ाई तेज, एक साल से अटके हैं चुनाव
बिश्नोई महासभा के भीतर पिछले एक वर्ष से नेतृत्व को लेकर खींचतान जारी है। चुनाव लगातार टलते रहे हैं। देवेंद्र बूड़िया ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर चुनाव की समयसारणी और तैयारियों का विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि महासभा में 70 हजार आजीवन सदस्य दर्ज हैं, जिनमें से अधिकांश सदस्यता उस समय बनी जब कुलदीप बिश्नोई संगठन में सक्रिय थे।
सभी सदस्यों का वेरिफिकेशन ऑनलाइन सिस्टम से किया जाएगा और उसके बाद संशोधित वोटर लिस्ट जारी होगी। पहली सूची 10 दिसंबर से 10 जनवरी के बीच जारी होने की संभावना है, जबकि महासभा के चुनाव फरवरी में आयोजित किए जाने की तैयारी है।
बूड़िया और पनिहार के बीच पुराना विवाद फिर चर्चा में
करीब एक साल पहले देवेंद्र बूड़िया ने विधायक रणधीर पनिहार पर उनका अपहरण करने की कोशिश का गंभीर आरोप लगाया था। बूड़िया ने दावा किया था कि कुलदीप बिश्नोई द्वारा उन पर जबरन इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा था और पनिहार ने कथित रूप से हरियाणा भवन से उन्हें किडनैप करने की कोशिश की।
इन आरोपों को लेकर बूड़िया ने राजस्थान में बड़ा अभियान भी चलाया था। हालांकि, अब जब पनिहार कुलदीप बिश्नोई के साथ राजस्थान पहुंचे, तो समाज के लोगों ने उनका स्वागत किया, जिससे राजनीतिक हवा एक बार फिर बदलती नजर आई।
जेल से बाहर आने के बाद से खामोश हैं बूड़िया
करीब दो महीने पहले हिसार फास्ट ट्रैक कोर्ट से रेप केस में जमानत मिलने के बाद देवेंद्र बूड़िया ने कहा था कि वह न्याय प्रणाली में पूरा विश्वास रखते हैं और सत्य की जीत हुई है।
कुलदीप बिश्नोई पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने किसी भी टिप्पणी से साफ इनकार किया था। उनका कहना था कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए वह इस विषय पर कुछ नहीं कहना चाहते।
जेल से बाहर आने के बाद भी बूड़िया ने कुलदीप बिश्नोई पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया, जिससे दोनों नेताओं के बीच मौन राजनीतिक तनाव अभी भी बरकरार दिखता है।