शिमला, 13 मार्च -:जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आज उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में वर्ष 2026 के जनवरी और फरवरी माह में जिला में हुई सड़क दुर्घटनाओं की समीक्षा की गई। इस दौरान सामने आया कि इस अवधि में कुल 42 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 19 लोगों की जान गई। इन मृतकों में 11 लोग स्वयं वाहन चला रहे थे।
बैठक में उपायुक्त ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में सबसे बड़ी वजह मानवीय त्रुटियाँ हैं। उन्होंने वाहन चलाते समय नियमों का सख्त पालन करने और ओवरस्पीड, शराब के नशे में वाहन चलाने तथा ओवरटेकिंग जैसी खतरनाक गतिविधियों से बचने का निर्देश दिया। “यह डेटा अत्यंत चिंताजनक है, इसलिए सभी वाहन चालक अपनी और दूसरों की जिंदगी को जोखिम में न डालें।इसके अलावा, उपायुक्त ने आपदा मित्रों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि उनके मोबाइल नंबर और पता पुलिस और परिवहन विभाग के साथ साझा किए जाएं। दुर्घटना की स्थिति में आपदा मित्रों की मदद तुरंत ली जा सकेगी।
जिला परिवहन अधिकारी विश्व देव मोहन चौहान ने बैठक में बताया कि जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को कम करना और यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाना है। समिति हर जिले में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत बनाई जाती है। बैठक में विशेष रूप से दुर्घटना संभावित स्थानों या “ब्लैक स्पॉट” की समीक्षा की गई और वहाँ स्पीड ब्रेकर, चेतावनी संकेत, सड़क मरम्मत और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए सुधारात्मक कदम उठाने पर चर्चा हुई।साथ ही, समिति द्वारा जनता में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भी कई अभियान चलाए जाते हैं। स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, नशे में वाहन न चलाने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाता है।बैठक में एडीएम लॉ एंड ऑर्डर पंकज शर्मा, डीएसपी ट्रैफिक चंद्रशेखर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। समिति लगातार सड़क सुरक्षा पर निगरानी रख रही है और सुधारात्मक कदमों को लागू करने में सक्रिय है।