Summer express/सिरसा, विजय कुमार -:हरियाणा में जहां ज्यादातर किसान गेहूं, धान और कपास जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं, वहीं सिरसा जिले के गांव रसूलपुर के प्रगतिशील किसान केसर चंद ने खेती में नया प्रयोग कर मिसाल पेश की है। सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त सब डिविजनल क्लर्क केसर चंद आज ड्रैगन फ्रूट, सब्जियों और जैविक खेती के जरिए लाखों रुपये की आमदनी कर रहे हैं। कम पानी में होने वाली ड्रैगन फ्रूट की खेती ने न केवल उनकी आय बढ़ाई है बल्कि दूसरे किसानों के लिए भी नई राह दिखाई है।
रसूलपुर गांव के किसान केसर चंद ने अपने परिवार के साथ मिलकर खेती में फसल विविधिकरण को अपनाया। पहले उन्होंने प्याज, लहसून, आलू, बेबी कॉर्न और सब्जियों की खेती शुरू की। इन फसलों में अच्छा मुनाफा मिलने के बाद उन्होंने डेढ़ एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती का प्रयोग किया। आज यह प्रयोग उनकी सफलता की पहचान बन चुका है।केसर चंद के अनुसार इस बार करीब 30 क्विंटल ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन हुआ, जिससे लगभग 6 लाख रुपये का मुनाफा मिला। उनकी फसल की मांग हरियाणा, पंजाब और राजस्थान तक है। बड़े व्यापारी सीधे खेतों से ड्रैगन फ्रूट खरीदकर बड़े शहरों में सप्लाई करते हैं।ड्रैगन फ्रूट की खासियत यह है कि इसमें पानी की खपत बेहद कम होती है। सिरसा जैसे क्षेत्र में जहां सिंचाई के पानी की कमी बनी रहती है, वहां यह फसल किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है।केसर चंद बताते हैं कि तीसरे साल तक एक एकड़ में करीब 50 क्विंटल उत्पादन संभव है, जिससे लाखों रुपये की आय हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह फल स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है और शरीर में खून बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
खेती में केसर चंद का पूरा परिवार साथ देता है। उनकी पत्नी बागा रानी, बेटा हरनेक सिंह और बहू दर्शना रानी दिन-रात खेतों में मेहनत करते हैं। परिवार पूरी तरह जैविक खेती को बढ़ावा दे रहा है।केसर चंद के खेतों में इस समय 6 एकड़ में लहसून, 3 एकड़ में प्याज, 4 कनाल में आलू, 1 एकड़ में बेबी कॉर्न और डेढ़ एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती की जा रही है। इसके अलावा अमरूद का बाग और कई प्रकार की सब्जियों की खेती भी की जा रही है।
केसर चंद के बेटे हरनेक सिंह ने बताया कि वर्ष 2020 में उन्होंने पंजाब के बरनाला से ड्रैगन फ्रूट की खेती की जानकारी जुटाई थी। इसके बाद पौधे लाकर खेत में लगाए गए और आज यह खेती परिवार के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है।उन्होंने बताया कि ड्रैगन फ्रूट जमीन से ऊपर तैयार संरचना पर लगाया जाता है, इसलिए बारिश, आंधी और खराब मौसम का असर इस पर कम पड़ता है। यही वजह है कि इसमें नुकसान की संभावना भी काफी कम रहती है।फसल विविधिकरण और आधुनिक खेती के जरिए सिरसा के किसान केसर चंद ने साबित कर दिया है कि नई सोच और मेहनत से खेती को घाटे का नहीं बल्कि मुनाफे का सौदा बनाया जा सकता है। उनकी सफलता अब आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।